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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 के अनुसार,3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नोएडा का प्रदर्शन पिछले साल की तुलना में खराब हुआ है और यह वायु प्रदूषण के मामले में देश में नौवें स्थान पर है। पिछले वर्ष नोएडा छठे स्थान पर था। दूसरी ओर, इंदौर ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पहला स्थान हासिल किया है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) रैंकिंग में इंदौर के बाद जबलपुर दूसरे और आगरा व सूरत संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे। 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में अमरावती पहले, झांसी और मुरादाबाद दूसरे, तथा अलवर तीसरे स्थान पर रहे। 3 लाख से कम आबादी वाले शहरों में देवास शीर्ष पर रहा, इसके बाद परवाणू और अंगुल का स्थान रहा।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि NCAP के तहत 130 शहरों में से 64 ने 2017-18 की तुलना में PM10 स्तर में 20% या अधिक कमी हासिल की है, जबकि 25 शहरों में 40% से अधिक कमी दर्ज की गई।
नोएडा में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 150 से ऊपर रहा है, और कुछ क्षेत्रों जैसे सेक्टर-62 में AQI 425 तक पहुंच गया, जो "गंभीर" श्रेणी में आता है। ग्रेटर नोएडा की स्थिति और भी खराब रही, जहां AQI 434 तक पहुंचा, जिसके कारण यह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर और NCR का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। प्रदूषण नियंत्रण के लिए नोएडा में ग्रैंड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया गया है।
इसके तहत 14 टीमें निर्माण स्थलों और सड़कों की निगरानी कर रही हैं, 20 टैंकरों से सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है, और 38 एंटी-स्मॉग गन का उपयोग हो रहा है। साथ ही, 340 किलोमीटर सड़कों की सफाई और 527.45 टन निर्माण कचरे का निस्तारण किया गया। नोएडा शहर की तरफ से 200 अंकों के साथ दावा करने का आवेदन किया था। मूल्यांकन में यह 184.2 अंक पाकर 9 वे स्थान पर रहा।
मंत्री भूपेंद्र यादव ने शहरों से इंदौर की तरह कदम उठाने की अपील की और नागरिकों से रीसाइक्लिंग व परिपत्र अर्थव्यवस्था को अपनाने का आग्रह किया। इसके अलावा, 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशभर में 75 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य भी रखा गया है।