स्कूल शिक्षा में लोकतांत्रिक व्यवस्था की समझ को और मजबूत करने की दिशा में नया बदलाव किया गया है। अब कक्षा-9 के विद्यार्थियों को चुनावी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। नए पाठ्यक्रम में चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को मतदान प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक प्रणाली के कार्यों से शुरुआती स्तर पर परिचित कराना है।
चुनाव आयोग की भूमिका को विस्तार से समझेंगे छात्र
नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में चुनाव आयोग के कामकाज को विस्तार से शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना केवल मतदान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई व्यवस्थाएं और जिम्मेदारियां होती हैं। चुनाव आयोग मतदाता सूची तैयार करने, चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का काम करता है।
SIR क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है
नई किताब में पहली बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को अलग अध्याय के रूप में जोड़ा गया है। इसमें बताया गया है कि मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना क्यों जरूरी होता है। इस प्रक्रिया के जरिए सूची में मौजूद त्रुटियों को सुधारा जाता है और पात्र मतदाताओं की सही जानकारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।
नए मतदाता जुड़ेंगे, त्रुटियां होंगी दूर
पाठ्यक्रम में यह भी समझाया गया है कि जब कोई व्यक्ति 18 वर्ष की आयु पूरी करता है तो उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है। वहीं जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिन्होंने निवास स्थान बदला है या जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज हैं, उनके रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया भी शामिल रहती है।
चुनाव को भरोसेमंद बनाने वाले उपायों की जानकारी
विद्यार्थियों को चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने वाले विभिन्न साधनों की जानकारी भी दी जाएगी। इसमें EVM, VVPAT, मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट और मतदाता जागरूकता अभियानों का उल्लेख किया गया है। इससे छात्र यह समझ पाएंगे कि चुनावी व्यवस्था को व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने के लिए किन व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
गठबंधन सरकारों के अध्ययन पर भी फोकस
नई पुस्तक में छात्रों के लिए गतिविधि आधारित अध्ययन भी जोड़ा गया है। इसमें अलग-अलग लोकसभा चुनावों के बाद बनी गठबंधन सरकारों का अध्ययन करने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर देना है।