
एनसीईआरटी (NCERT) ने इस बार विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर दो नए मॉड्यूल जारी किए हैं. एक मिडिल क्लास (मध्य स्तर) और दूसरा सेकेंडरी (द्वितीयक स्तर) के छात्रों के लिए. इन मॉड्यूल्स में भारत के विभाजन (1947) को केवल अपरिहार्य ऐतिहासिक घटना नहीं बताया गया, बल्कि यह कहा गया है कि यह फैसला नेताओं की गलतियों और जल्दबाजी के कारण हुआ. मॉड्यूल्स में लिखा गया है कि भारत का विभाजन किसी भी हालत में अनिवार्य नहीं था. इसे तीन व्यक्तियों से जोड़ते हुए कहा गया –
1. मोहम्मद अली जिन्ना – जिन्होंने विभाजन की मांग की.
2. कांग्रेस नेतृत्व – जिन्होंने इसे स्वीकार किया.
3. लॉर्ड माउंटबेटन – जिन्होंने इसे औपचारिक रूप से लागू किया और जल्दबाजी में सत्ता का हस्तांतरण कर दिया. इन मॉड्यूल्स में कांग्रेस नेताओं पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जिन्ना को हल्के में लिया और विभाजन के बाद होने वाले बड़े पैमाने के नुकसान का अनुमान नहीं लगाया.
विभाजन को बताया मानवीय त्रासदी
पाठ्य सामग्री में विभाजन को “अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी” बताया गया है. इसमें लिखा है कि विश्व इतिहास में इतनी बड़ी हिंसा और विस्थापन की मिसाल नहीं मिलती. लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए. हजारों की संख्या में सामूहिक हत्याएं हुईं. महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर यौन हिंसा हुई. शरणार्थियों की रेलगाड़ियां लाशों से भरी आती थीं.
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पहले से शुरू हो गई थी हिंसा
मॉड्यूल में यह भी बताया गया है कि विभाजन से पहले ही हिंसक घटनाएं शुरू हो चुकी थीं.
1946 का नोआखली और कलकत्ता दंगा
1947 का रावलपिंडी और पंजाब का नरसंहार
इन्हें विभाजन की भयावहता का शुरुआती उदाहरण बताया गया.
जिन्ना का दबाव और कांग्रेस की सहमति
मॉड्यूल के अनुसार, मुस्लिम लीग के "प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस" (Direct Action Day) 1946 ने विभाजन की दिशा तय कर दी थी. जिन्ना ने उस समय चेतावनी दी थी, “या तो विभाजित भारत या नष्ट भारत.” इस दबाव में कांग्रेस नेताओं, खासकर नेहरू और पटेल ने समझौता करना स्वीकार किया.
जल्दबाजी में सत्ता हस्तांतरण
NCERT के अनुसार, लॉर्ड माउंटबेटन की भूमिका भी बेहद गैर-जिम्मेदाराना रही. उन्होंने सत्ता हस्तांतरण इतनी जल्दी किया कि लाखों लोग यह भी नहीं जान पाए कि वह किस देश में शामिल हैं भारत में या पाकिस्तान में. इस जल्दबाजी को मॉड्यूल्स में “लापरवाही का बड़ा कार्य” कहा गया है.
विभाजन की स्थायी चुनौतियां
दूसरा मॉड्यूल विभाजन को भारत की आज की कई समस्याओं से जोड़ता है. इसमें कहा गया है कि कश्मीर संघर्ष और तीन भारत-पाक युद्ध विभाजन का नतीजा हैं. पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद और कट्टरता का फैलाव इसी की देन है. भारत की विदेश नीति और आंतरिक राजनीति पर विभाजन का असर आज भी दिखाई देता है.
जिन्ना की स्वीकारोक्ति
दिलचस्प बात यह है कि मॉड्यूल्स में जिन्ना का एक बयान भी शामिल किया गया है. जिन्ना ने कहा था “मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा. मैंने अपने जीवनकाल में पाकिस्तान देखने की उम्मीद नहीं की थी.” इससे पता चलता है कि विभाजन कितना अप्रत्याशित था.
मिडिल लेवल के मॉड्यूल्स में भाषा को आसान रखा गया है, लेकिन संदेश वही है कि भारत का विभाजन तीन मुख्य कारणों से हुआ- जिन्ना की जिद, कांग्रेस की सहमति और माउंटबेटन की जल्दबाजी.
मॉड्यूल का समापन भावी पीढ़ियों के लिए एक चेतावनी के रूप में किया गया है कि “अगर शासक दूरदर्शिता नहीं दिखाते तो राष्ट्रीय आपदाएं जन्म ले सकती हैं. शांति के लिए हिंसा को छूट देने से हिंसा की भूख और बढ़ जाती है.” इस तरह नया NCERT मॉड्यूल छात्रों को न सिर्फ इतिहास की घटनाओं के बारे में बताता है, बल्कि उनसे सबक लेने का भी संदेश देता है.