
नई दिल्ली में संसद परिसर के बाहर NDA सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया क्योंकि ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की. टीवी बहस में उन्होंने डिंपल यादव की पोशाक पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर डाली. इस दौरान उन्होंने सांसद इकरा हसन का भी जिक्र किया.
प्रोटेस्ट को मिला NDA का साथ
इस घटना पर बांसुरी स्वरज सहित NDA सांसदों ने कहा कि वो किसी महिला सांसद के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि उनकी पत्नी की गरिमा से जुड़ा मामला है.
लखनऊ में शिकायत दर्ज
लखनऊ पुलिस ने प्रवेश यादव की शिकायत पर साजिद रशीदी के खिलाफ BNS की धारा 79, 196, 299, 352 और IT Act की धारा 67 के तहत FIR दर्ज की है. डिंपल यादव ने FIR के स्वागत के साथ यह भी कहा कि NDA नेताओं ने मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर कोई प्रदर्शन नहीं किया. यह विरोध “मौन लागूः लक्षणम्” जैसी तुष्टिकरण की राजनीति दिखाता है.
बता दें कि मौलाना साजिद रशीदी की समाजवादी सांसद डिंपल यादव पर टिप्पणी ने महिला सम्मान और सार्वजनिक मंच पर गरिमा की रक्षा की ज़रूरत पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं. संसद परिसर में आयोजित किए गए विरोध प्रदर्शन ने इस बात का स्पष्ट संदेश दिया कि ऐसे बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. लखनऊ पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR ने भी यह संकेत दिया कि कानूनीन स्तर पर कार्रवाई संभव है और महिलाओं के प्रति इस तरह की टिप्पणी सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकती हैं.
इस पूरे घटनाक्रम ने एक गहरी राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है कि क्या सार्वजनिक व्यक्तियों के पहनावे, धर्म, स्थान और सम्मान से जुड़ा अधिकार बुनियादी नागरिक गरिमा का हिस्सा होना चाहिए? साथ ही, सपा नेता डिंपल यादव ने प्रश्न उठाया कि ऐसी टिप्पणियों पर अन्य संवेदनशील घटनाओं जैसे मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के वक्त प्रदर्शन क्यों नहीं किया गया? फिलहाल यह मामला सिर्फ एक टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उत्पन्न विवाद ने राज्य और देश की राजनीति में महिला सम्मान और मौन राजनीति के स्वरूप पर भी प्रकाश डाला है.