राज्यसभा चुनाव के ताजा नतीजों के बाद संसद के ऊपरी सदन का राजनीतिक गणित बदलता दिखाई दे रहा है। बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन अपनी संख्या में बढ़त दर्ज करता नजर आ रहा है और अब वह दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के काफी करीब पहुंच चुका है। दूसरी तरफ विपक्षी दलों की संख्या सीमित होती दिख रही है, जबकि कुछ राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले समय में सदन की तस्वीर को और बदल सकते हैं।
राज्यसभा चुनाव के बाद बदला शक्ति संतुलन
हालिया चुनाव प्रक्रिया के बाद राज्यसभा में एनडीए गठबंधन की स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत मानी जा रही है। ऊपरी सदन में बीजेपी अभी भी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। चुनाव परिणामों के बाद एनडीए का कुल आंकड़ा बढ़कर 152 सीटों तक पहुंच गया है। शुरुआती चरण में निर्विरोध चुने गए सांसदों में भी गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली थी।
दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर एनडीए
राज्यसभा में किसी भी बड़े संवैधानिक संशोधन या विशेष विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत अहम माना जाता है। मौजूदा स्थिति में एनडीए इस आंकड़े से करीब 11 सीट पीछे बताया जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में यदि राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो सरकार के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों की राह आसान हो सकती है।
टीएमसी सांसदों के इस्तीफे से बढ़ सकती है हलचल
हाल ही में कुछ सांसदों के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि इन खाली होने वाली सीटों का असर आगामी राज्यसभा समीकरण पर पड़ सकता है। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आगे कुछ और बदलाव देखने को मिल सकते हैं, हालांकि इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कुछ दल अभी भी किसी गठबंधन के साथ नहीं
राज्यसभा में कुछ ऐसी पार्टियां भी हैं जो औपचारिक रूप से किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि कई मौकों पर ये दल सरकार का समर्थन करते रहे हैं। इन दलों की भूमिका आगे आने वाले किसी महत्वपूर्ण मतदान में निर्णायक साबित हो सकती है।
विपक्षी गठबंधन की संख्या पर असर
विपक्षी खेमे की संख्या में भी बदलाव देखने को मिला है। कुछ दलों के अलग होने के बाद इंडिया गठबंधन की कुल ताकत घटकर 64 सांसदों तक पहुंच गई है। ऐसे में आने वाले संसद सत्रों में सरकार और विपक्ष के बीच संख्या बल की लड़ाई और दिलचस्प हो सकती है।