Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी जिंदगी और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर लोगों के बीच काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है। फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया पर कई दर्शक बाबा से जुड़े अपने अनुभव और भावनाएं साझा कर रहे हैं। इसी बीच नीम करोली बाबा से जुड़ी एक पुरानी और कम चर्चित कहानी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि बाबा की अस्थियों का एक हिस्सा पिछले करीब 53 वर्षों से भोपाल में उनके परिवार के पास सुरक्षित है। परिवार के मुताबिक, अस्थि कलश को उनके बड़े बेटे अनेग सिंह के परिवार ने इतने लंबे समय से संभालकर रखा है। अब परिवार की योजना इस धरोहर को एक प्रस्तावित मंदिर और आश्रम में स्थापित करने की है।
11 सितंबर 1973 को वृंदावन में ली थी समाधि
नीम करोली बाबा को उनके अनुयायी श्रद्धा से ‘महाराज जी’ के नाम से पुकारते हैं। परिवार से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, उन्होंने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में देह त्याग किया था। उनके निधन के बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में प्रवाहित किए जाने की बात कही जाती है। हालांकि, अस्थियों का एक हिस्सा परिवार के पास भी रखा गया था। यही हिस्सा बाद में भोपाल ले जाया गया और तब से परिवार इसे सुरक्षित रखे हुए है।
भोपाल से रहा है बाबा का पुराना नाता
नीम करोली बाबा का भोपाल से भी गहरा संबंध बताया जाता है। उनके पोते डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, बाबा वर्ष 1970 में करीब दस दिनों तक भोपाल के अरेरा कॉलोनी स्थित उनके परिवार के घर में ठहरे थे। इस दौरान उन्होंने शहर के कई स्थानों का भ्रमण किया। बताया जाता है कि उन्होंने नेवरी मंदिर में एक रात भी बिताई थी। बाबा का भोपाल से जुड़ा यह प्रसंग परिवार के लिए आज भी खास महत्व रखता है। इसी जुड़ाव के चलते अस्थियों के एक हिस्से को भोपाल में रखने की परंपरा आगे बढ़ी।
पीढ़ियों से संभालकर रखा गया कलश
डॉ. धनंजय शर्मा के मुताबिक, उनके पिता और चाचा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन परिवार में बाबा के प्रति श्रद्धा आज भी बनी हुई है। उनके पिता का करीब चार साल पहले 97 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। धनंजय शर्मा बताते हैं कि बाबा ने उन्हें हनुमान जी की एक प्रतिमा भी भेंट की थी। परिवार आज भी उस प्रतिमा की पूजा करता है। उनके लिए अस्थि कलश भी बाबा की स्मृतियों और परिवार की आस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण निशानी है।
परिवार का दावा- ऐसा दूसरा कलश नहीं
परिवार का कहना है कि उनके पास सुरक्षित यह अस्थि कलश बेहद विशेष है। डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, देश में उनकी जानकारी के मुताबिक नीम करोली बाबा की अस्थियों से जुड़ा ऐसा दूसरा कलश मौजूद नहीं है। हालांकि, यह जानकारी परिवार के दावे पर आधारित है। बाबा के भक्तों के लिए इस कलश का धार्मिक महत्व उनकी आस्था से जुड़ा हुआ है। परिवार भी इसे महज एक वस्तु नहीं, बल्कि बाबा की स्मृति के रूप में देखता है।
भोपाल में मंदिर और आश्रम बनाने की तैयारी
अब परिवार भोपाल में नीम करोली बाबा के नाम पर मंदिर और आश्रम विकसित करने की तैयारी में जुटा है। योजना के अनुसार, निर्माण पूरा होने के बाद अस्थि कलश को वहां विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाएगा। अगर यह योजना आकार लेती है, तो लंबे समय से परिवार के संरक्षण में रही यह धरोहर भविष्य में बाबा के अनुयायियों के लिए भी दर्शन और श्रद्धा का केंद्र बन सकती है।
‘हनुमान अंश’ के बाद फिर बढ़ी बाबा की चर्चा
नीम करोली बाबा से जुड़ी इस कहानी की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब ‘हनुमान अंश’ को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह है। बाबा के जीवन से प्रेरित बताई जा रही इस फिल्म के बाद सोशल मीडिया पर उनके जीवन, चमत्कारों और उनसे जुड़े पुराने किस्सों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फिल्म की सफलता को लेकर भी फिल्म समीक्षक तरण आदर्श समेत कई लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। इसी वजह से नीम करोली बाबा से जुड़ी पुरानी कहानियां एक बार फिर लोगों की दिलचस्पी का विषय बन गई हैं।