नीमच मंडी: औषधीय फसलों का एशिया का सबसे अनोखा बाजार..भारत विविधताओं का देश है, लेकिन मध्यप्रदेश इन विविधताओं में भी अलग ही रंग भरता है। यहां की एक मंडी इतनी अनोखी है कि सुनकर हर कोई हैरान हो जाए। इस मंडी में न धान बिकते हैं, न
गेहूं और न ही सब्जियां... बल्कि यहां सूखे पत्ते, कांटे, फूल, फली, छिलके और जड़ें तक बोली लगाकर खरीदी जाती हैं। हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश की नीमच मंडी की, जो देश की इकलौती ऐसी मंडी है, जहां औषधीय पौधों और सूखी वन उपज की बाकायदा
नीलामी होती है। यह मंडी किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बन चुकी है।
सूखे
फूलों से लाखों की
कमाई
नीमच मंडी में नीम की पत्ती, गुलाब के सूखे फूल, संतरे के छिलके, बबूल की फली और भटकटैया के कांटे जैसे उत्पादों की नीलामी होती है। यह केवल सामान्य सूखी वनस्पतियाँ नहीं हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। देशभर के व्यापारी इन्हें यहां से खरीदकर विदेशों में दवा और हर्बल उत्पाद बनाने वाली कंपनियों तक पहुंचाते हैं।
देशभर
के किसान पहुंचते हैं नीमच
इस मंडी की खास बात यह है कि यहां मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्यों से भी किसान आते हैं। यहां तक कि कुछ किसान तो साल में केवल इसी मंडी में व्यापार करने के लिए विशेष तैयारी करते हैं। लगभग 65 से ज्यादा औषधीय फसलों की बोली लगती है, जो 500 रुपए से लेकर 2 लाख तक जाती है।
अंतरराष्ट्रीय
बाजार में बढ़ी मांग
नीमच मंडी सिर्फ देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी फसलों की मांग अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और रूस तक है। व्यापारी इन जड़ी-बूटियों को सफाई और ग्रेडिंग के बाद निर्यात करते हैं। इनमें से कई औषधियां जैसे अश्वगंधा, बेल, गिलोई, नागरमोथा, सफेद मूसली, लेमनग्रास आदि स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहद उपयोगी होती हैं।
दवाओं में काम आती हैं ये दुर्लभ औषधियां
यहां बिकने वाली फसलें दवाओं और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स में प्रयोग की जाती हैं। अमरबेल, शिशम के पत्ते, अकरकरा की जड़, गोखरू, धतूरे के फूल, काली जीरी और टेसू फूल जैसे कई पौधे आयुर्वेदिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसान इन्हें जंगलों और खेतों से एकत्र कर मंडी में बेचते हैं।
भविष्य
की संभावनाओं से भरी मंडी
नीमच मंडी न केवल एक व्यापारिक केंद्र है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी जरिया बन चुकी है। अब सरकार भी इस दिशा में और विस्तार की योजनाएं बना रही है, जिससे देश के अन्य हिस्सों में भी औषधीय खेती को बढ़ावा मिल सके।