NEET ADMISSION SCAM :उत्तराखंड में फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए MBBS में एडमिशन कराने के मामले में SIT ने तीसरी गिरफ्तारी की है। भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव को एजेंट के तौर पर पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक, उसके पास से कमीशन के 5.58 लाख रुपये बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए MBBS सीट दिलाने के लिए 45 लाख रुपये तक की डील की गई थी।
मास्टरमाइंड की निशानदेही पर भोपाल से गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, पहले गिरफ्तार किए गए रूपेश पंडित और अरविंद कुमार से पूछताछ के बाद जांच भोपाल तक पहुंची। रूपेश की निशानदेही पर धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया। SIT का दावा है कि धीरज इस नेटवर्क में एजेंट की भूमिका निभा रहा था। उसके पास से कमीशन के 5.58 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। रूपेश के घर से भी पुलिस करीब 8 लाख रुपये बरामद कर चुकी है।
45 लाख में MBBS सीट दिलाने का दावा
जांच में सामने आया कि रूपेश पंडित एजुकेशन कंसल्टेंसी चलाता था। पुलिस के अनुसार, तीन अभ्यर्थियों के परिवारों से फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे के जरिए MBBS एडमिशन कराने के लिए प्रत्येक से 45 लाख रुपये मांगे गए थे। तीनों परिवारों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लेने की बात भी जांच में सामने आई है।
चार छात्राओं के सर्टिफिकेट से खुला मामला
यह मामला 3 सितंबर को सामने आया था, जब चार छात्राओं के फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे से जुड़े सर्टिफिकेट संदिग्ध पाए गए। जांच में चारों प्रमाणपत्रों में एक ही फ्रीडम फाइटर धर्मवीर वर्मा के नाम का इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आई। सरकारी रिकॉर्ड में उनके फ्रीडम फाइटर होने का रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद सर्टिफिकेट रद्द किए गए और इन प्रमाणपत्रों के आधार पर हुए MBBS एडमिशन भी निरस्त कर दिए गए।
फर्जी दस्तावेजों से अलग-अलग कॉलेजों में एडमिशन
SIT की जांच में आरोप है कि अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर फ्रीडम फाइटर आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए गए। इसके बाद अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS एडमिशन कराया गया। जांच टीम CSC सेंटरों से लेकर सरकारी सत्यापन प्रक्रिया तक की कड़ियों को खंगाल रही है।
करीब 12 लोग जांच के दायरे में
मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस के अनुसार करीब 12 अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। SIT यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए, उन्हें सरकारी सत्यापन तक कैसे पहुंचाया गया और एजेंटों के नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। आगे की गिरफ्तारियां जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेंगी।