नीट परीक्षा को लेकर उठे सवालों और छात्रों की नाराजगी के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों को केंद्र में रखने की पहल की है। पार्टी ने प्रभावित छात्रों की समस्याओं को सुनने और उन्हें संगठित तरीके से उठाने के लिए ‘युवा मामलों की समिति’ का गठन किया है। साथ ही “छात्रों की गूंज” नाम से एक अभियान शुरू किया गया है, जिसके जरिए प्रदेशभर के छात्रों और युवाओं से सीधे संवाद स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
छात्रों तक पहुंचने की रणनीति पर जोर
कांग्रेस का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में पार्टी ने तय किया है कि युवाओं की बात सीधे सुनी जाए। इसी उद्देश्य से बनाई गई युवा मामलों की समिति विभिन्न क्षेत्रों में जाकर छात्रों से मुलाकात करेगी, उनकी शिकायतें सुनेगी और सुझाव जुटाएगी।
‘छात्रों की गूंज’ बनेगा युवाओं का मंच
पार्टी ने इस अभियान को सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम के बजाय युवाओं की आवाज को सामने लाने की पहल बताया है। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा। अभियान के माध्यम से शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी युवाओं की राय ली जाएगी।
युवा नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी
अभियान को जमीन पर मजबूत बनाने के लिए पार्टी ने अपने कई युवा नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। समिति में प्रियव्रत सिंह, जयवर्धन सिंह, सचिन यादव, कुणाल चौधरी, यश घनघोरिया, विपिन वानखेड़े, मितेंद्र दर्शन सिंह, आशुतोष चौकसे, मनीष चौधरी, पोरलाल खरते, आनंद जाट और सदफ खान को शामिल किया गया है। इन नेताओं पर छात्रों और युवाओं के बीच संवाद स्थापित करने की जिम्मेदारी रहेगी।
युवाओं के मुद्दों को जनचर्चा का विषय बनाने की कोशिश
कांग्रेस का मानना है कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवाल केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे समाज से जुड़ा विषय है। इसी वजह से पार्टी इन मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने और जनचर्चा का हिस्सा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
न्याय और पारदर्शिता की मांग
पार्टी का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। कांग्रेस का दावा है कि उसका अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों की चिंताओं को उचित मंच नहीं मिलता और उनके हितों से जुड़े मुद्दों पर ठोस चर्चा आगे नहीं बढ़ती। आने वाले दिनों में यह अभियान प्रदेश की राजनीति और छात्र समुदाय दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।