पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। बिहार सरकार ने इस प्रकरण को आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या मानते हुए केंद्र सरकार से CBI जांच की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर यह कदम उठाया गया, जिसकी जानकारी गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने सार्वजनिक की। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
CBI जांच की सिफारिश और सरकारी रुख
राज्य सरकार ने कांड संख्या 14/26 के तहत दर्ज इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं केंद्र सरकार को पत्र भेजकर इस केस को CBI को सौंपने की सिफारिश की है। सरकार का कहना है कि मामले से जुड़े सभी साक्ष्य केंद्रीय एजेंसी को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसी भी स्तर पर जांच प्रभावित न हो।
सरकार की ओर से सख्त संदेश
बीजेपी नेताओं ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। पार्टी प्रवक्ताओं ने दावा किया कि राज्य पुलिस और विशेष जांच टीम द्वारा जुटाए गए सभी सबूत CBI को सौंपे जाएंगे। साथ ही यह भी कहा गया कि दोषी चाहे जहां छिपा हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाएगा और जांच में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
जेडीयू ने जताई संवेदना, विपक्ष पर निशाना
जेडीयू नेताओं ने छात्रा की मौत को बेहद दुखद बताते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री की नीति शुरू से अपराध के खिलाफ सख्त रही है और इस मामले में भी बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है।
हत्या मानकर आगे बढ़ रही जांच
सरकारी बयान के मुताबिक शुरुआती जांच के बाद अब इस प्रकरण को हत्या मानकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ी इस घटना में कई पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है, जिनमें छात्रा के संपर्क, हॉस्टल की गतिविधियां और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि हर एंगल से मामले की छानबीन की जाएगी।
राजनीतिक माहौल और आगे की दिशा
CBI जांच की सिफारिश के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल सच्चाई सामने लाना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है। वहीं विपक्षी दल लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस सिफारिश पर कब फैसला लेती है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।