डॉक्टर बनने का सपना बहुत से छात्र देखते हैं, लेकिन कुछ ही उसे साकार कर पाते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है माधुरी रेड्डी की, जिन्होंने अपनी मेहनत और मजबूत इरादों से NEET 2019 में ऑल इंडिया 7वीं रैंक हासिल की। माधुरी ने कक्षा 7 से ही डॉक्टर बनने की ठान ली थी और रोज़ 10 से 12 घंटे की पढ़ाई करके अपने सपने को साकार किया। माधुरी ने 720 में से 695 अंक प्राप्त किए और 99.999 पर्सेंटाइल के साथ महिला वर्ग में टॉप किया। उनकी यह सफलता हर उस छात्र के लिए उदाहरण है जो मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है।
डॉक्टर बनने का सपना बचपन से
माधुरी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं।उन्होंने कक्षा 7 में मेडिकल फाउंडेशन कोर्स जॉइन किया। कोचिंग संस्थान में गंभीरता से पढ़ाई की और स्कूल में भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा। 12वीं बोर्ड परीक्षा में 98.6% अंक हासिल किए।
मेहनत के पीछे की रणनीति
रोज़ाना 10-12 घंटे पढ़ाई का रूटीन बनाया।NEET 2019 में 695 अंक और ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की।AP EAMCET में 5वीं रैंक, AIIMS और JIPMER की परीक्षा भी दी।लगातार टेस्ट प्रैक्टिस, रिविजन और टाइम मैनेजमेंट को अपनाया।
परिवार और गुरुओं का योगदान
माधुरी ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया।पिता एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मां गृहिणी हैं। परिवार से मिला मानसिक सहयोग और शिक्षकों की गाइडेंस बना जीत की कुंजी।
शौक भी बनाए रखे
पढ़ाई के साथ बैडमिंटन, फिल्में देखना और क्रिकेट देखने का शौक भी रखा।संतुलन के कारण मानसिक रूप से बनीं मजबूत और फोकस्ड।
सीख क्या है?
माधुरी की सफलता बताती है कि"अगर तैयारी सही दिशा में हो और संकल्प अटूट हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं”