मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने NEET UG 2024 परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के पक्ष में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को निर्देश दिए हैं कि वह उन छात्रों की पुनः परीक्षा आयोजित करे, जिनका 4 मई को आयोजित NEET UG एग्जाम प्राकृतिक कारणों से प्रभावित हुआ था। कोर्ट के इस फैसले से इंदौर और उज्जैन के बीच स्थित परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने वाले 100 से अधिक छात्रों को दोबारा अवसर मिलने जा रहा है।
आंधी-तूफान से बाधित हुई थी परीक्षा
NEET UG की यह परीक्षा 4 मई को पूरे देश में आयोजित की गई थी, लेकिन इंदौर के कुछ परीक्षा केंद्रों पर तेज आंधी और बिजली गुल होने के कारण कई छात्रों को समय पर प्रश्नपत्र हल करने का पूरा मौका नहीं मिला।कई कमरों में लाइट नहीं थी, जिससे अभ्यर्थियों को दृष्टि संबंधी कठिनाई हुई।पंखे बंद होने और गर्मी बढ़ने से तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई थी।कई छात्रों ने बताया कि उन्हें पूरा समय नहीं मिला और परीक्षा अधूरी छूटी।
याचिका पर सुनवाई के बाद मिला न्याय
इस मामले में प्रभावित छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह माना कि परीक्षा की निष्पक्षता और समानता प्रभावित हुई है।कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया है कि वह सिर्फ उन्हीं याचिकाकर्ता छात्रों की दोबारा परीक्षा आयोजित करे, जिनके परीक्षा के समय में स्पष्ट रूप से बाधा आई थी।यह परीक्षा इंदौर और उज्जैन के प्रभावित क्षेत्र के केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।
शिक्षा में समान अवसरों की मिसाल
हाईकोर्ट के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर और न्याय के पक्ष में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।इससे यह संदेश गया है कि अगर किसी भी छात्र के साथ परीक्षा के दौरान अन्याय होता है, तो न्यायालय उसके अधिकार की रक्षा कर सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। NEET UG जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं युवाओं के करियर का आधार होती हैं। ऐसे में यदि किसी तकनीकी या प्राकृतिक कारण से परीक्षा प्रभावित होती है, तो उसका संज्ञान लेना और सुधारात्मक कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। हाईकोर्ट के इस फैसले ने यह सिद्ध कर दिया है कि विद्यार्थियों का भविष्य सर्वोपरि है और शिक्षा व्यवस्था में संवेदनशीलता और न्याय की भावना जरूरी है।