लखनऊ। खाद्य एवं रसद विभाग के अफसरों की गंभीर लापरवाही के चलते उत्तर प्रदेश को बोरा खरीद में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। तय समय पर कोलकाता जूट मिल को बोरे का ऑर्डर नहीं भेजे जाने से प्रदेश को 111.66 करोड़ रुपये का चूना लगा है।समय पर ऑर्डर नहीं भेजने से बोरा महंगा पड़ा।
बोरे की कीमत में भारी उछाल
विभाग ने बोरे की आपूर्ति के लिए मांग पत्र करीब तीन माह की देरी से भेजा। इस देरी के कारण बोरे की कीमत में भारी उछाल आ गया। एक गांठ बोरा का रेट बढ़कर 48,322 रुपये हो गया। अगर समय पर ऑर्डर किया जाता और भुगतान भी तुरंत कर दिया जाता, तो यही बोरा प्रदेश को मात्र 35,470 रुपये प्रति गांठ में मिल जाता।प्रति गांठ
12,852 रुपये का अतिरिक्त बोझ
देरी के चलते एक गांठ पर 12,852 रुपये ज्यादा खर्च हुए। कुल मिलाकर प्रदेश सरकार को 111.66 करोड़ रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़े। यह नुकसान खाद्य एवं रसद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अधिकारियों की सुस्ती मुख्य कारण
सूत्रों के अनुसार, विभाग के वरिष्ठ अफसरों ने समय पर ऑर्डर देने और भुगतान करने में पूरी तरह लापरवाही बरती। इस वजह से न केवल सरकारी खजाने पर बोझ पड़ा, बल्कि किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कार्रवाई की मांग
यह मामला सामने आने के बाद विभागीय अफसरों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। अफसरों का कहना है कि ऐसी लापरवाही बार-बार होने से प्रदेश का बजट प्रभावित होता है। विभाग को अपनी प्रक्रियाओं में तत्काल सुधार करना होगा।
प्रशासन को सबक
111.66 करोड़ रुपये का यह नुकसान विभाग के लिए बड़ा सबक है। समय पर निर्णय और समन्वय की कमी से भविष्य में ऐसे नुकसान से बचना होगा।