Neha Bora Peace Bond Case : दिल्ली में प्रदर्शनों को लेकर आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी नेहा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। नेहा का कहना है कि यह बॉन्ड उनके संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है। उनका आरोप है कि इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को रोकने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने साफ कहा है कि वह खुद इस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी और आइसा का कोई सदस्य भी ऐसा नहीं करेगा।
प्रदर्शन के बाद जारी हुआ था नोटिस
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ा है। इन प्रदर्शनों में सक्रिय रहने के कारण विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट यानी एसईएम ने नेहा बोरा को नोटिस जारी किया था। नोटिस में उनसे पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा गया था। इसके खिलाफ नेहा ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत से इस नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद भी नेहा अपने फैसले पर कायम हैं और बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर रही हैं।
हाई कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
नेहा बोरा ने 17 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। 23 अक्टूबर को अदालत ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने सुनवाई के दौरान कहा कि एसईएम के पास नेहा के खिलाफ कार्रवाई करने के पर्याप्त कारण थे। अदालत के मुताबिक, नोटिस केवल सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं था। एसईएम ने अपने फैसले के लिए जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया था। इसी आधार पर अदालत ने नोटिस पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की।
अदालत ने शांति भंग होने की आशंका पर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने उस इलाके का भी जिक्र हुआ, जहां नेहा को हिरासत में लिया गया था। आरोप था कि वह वहां लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रही थीं। अदालत के सामने यह दलील रखी गई कि संबंधित इलाका व्यावसायिक क्षेत्र है, जहां दफ्तर जाने वालों की भारी आवाजाही रहती है। वहां से कई महत्वपूर्ण सड़कें भी गुजरती हैं, जो शहर के मुख्य हिस्सों को दूसरे इलाकों से जोड़ती हैं। एसईएम ने इसी स्थिति को देखते हुए शांति भंग होने की आशंका जताई थी।
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संवैधानिक अधिकारों का हवाला दे रहीं नेहा
नेहा बोरा का कहना है कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित कर सकता है। उनका मानना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और किसी बॉन्ड के जरिए लोगों को प्रदर्शन से रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अकेले नहीं, बल्कि आइसा के सभी सदस्यों के साथ इस फैसले पर कायम रहेंगी। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद नेहा ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का अपना रुख साफ कर दिया है।
पीस बॉन्ड विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
नेहा बोरा और प्रशासन के बीच यह मामला अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच चर्चा में है। एक तरफ प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ अदालत ने एसईएम के नोटिस में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है। नेहा ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने की घोषणा की है। अब इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल विवाद का केंद्र पीस बॉन्ड की शर्तें और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर नेहा की आपत्ति है।