नेपाल में दक्षिण-पूर्वी मधेश प्रदेश के कई जिलों में हुई हिंसा के बाद गुरुवार को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। यह हिंसा रविवार को सुनसरी जिले से शुरू हुए हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच हुए सांप्रदायिक विवाद के कारण शुरू हुई थी।
हिंसा के दौरान पुलिस से हुई झड़पों
राष्ट्र के नाम टेलीविजन संबोधन में शाह ने कहा कि सरकार इस स्थिति को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने हिंसा के दौरान पुलिस से हुई झड़पों में मारे गए तीन लोगों, जय प्रकाश मेहता, ओम प्रकाश मेहता और गणेश यादव, के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की।
पारदर्शी जांच के बाद कानूनी कार्रवाई
प्रधानमंत्री शाह ने जनता को भरोसा दिलाया कि सुनसरी, सिराहा और अन्य प्रभावित जिलों में हुई घटनाओं के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "मैं सभी को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। सरकार सभी दोषियों को, चाहे वे कोई भी हों, कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।"
बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए
शाह ने बताया कि गृह मंत्रालय ने घटनाओं की जांच के लिए पहले ही एक जांच समिति बना दी है। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घायल लोगों का तुरंत और बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए। लोगों से जिम्मेदारी दिखाने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर अफवाहें, अपुष्ट जानकारी या ऐसी सामग्री साझा न करें जो सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती हो।
राष्ट्रीय नेतृत्व देने में विफल
प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब उनकी सरकार पर हिंसा फैलने के दौरान निष्क्रिय रहने के आरोप लग रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने उन पर संकट के समय राष्ट्रीय नेतृत्व देने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने आलोचना की कि प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई। साथ ही यह मुद्दा भी उठाया गया कि बुधवार को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री शामिल हुए। आलोचकों ने यह भी कहा कि शाह ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और सरकार की प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं दी।
राष्ट्रपति पौडेल से मुलाकात की
गुरुवार को प्रधानमंत्री शाह ने राष्ट्रपति पौडेल से मुलाकात की। मधेश प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार को भी तनाव बना रहा। सुनसरी के कप्तानगंज क्षेत्र में हुई हिंसा के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पूरे क्षेत्र में फैल गए। सिराहा जिले के गोलबाजार और लहान तथा धनुषा जिले के जनकपुरधाम सहित कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। ये प्रदर्शन दिन भर विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित किए गए थे। सिराहा में हुई झड़पों के दौरान गोली लगने से एक किशोर, गणेश यादव, की मौत हो गई। वहीं जय प्रकाश मेहता की रविवार को सुनसरी में हुई झड़पों में लगी चोटों के कारण मौत हो गई। ओम प्रकाश मेहता की भी रविवार को सुनसरी की हिंसा में जान चली गई थी।
पुलिस के कई जवान घायल
धनुषा और सिराहा में पुलिस के कई जवान भी घायल हुए। सिराहा में आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने सिराहा के कई इलाकों और धनुषा के जनकपुरधाम में कर्फ्यू लगा दिया। वहीं भारत सीमा से लगे पर्सा जिले में निषेधाज्ञा लागू की गई। हिंसा की शुरुआत 26 जुलाई को हुई थी, जब सुनसरी जिले की देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका-तीन के कप्तानगंज क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच स्थानीय स्तर पर झड़प हुई।