नेपाल में तख्तापलट के बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पहली बार खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने देश के युवाओं (Gen-Z) को भावुक शब्दों में संबोधित किया है। शिवपुरी में सेना के बीच सुरक्षित क्षेत्र में बैठे ओली ने बच्चों, शांति, पिता न बन पाने का दर्द, भारत से सीमा विवाद और भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर अपनी जिद्दी सोच जाहिर की है।
ओली ने साझा की अपनी लोकेशन और भावनाएं
केपी शर्मा ओली ने पत्र में स्पष्ट किया कि वह फिलहाल नेपाल सेना के सैनिकों से घिरे शिवपुरी क्षेत्र में हैं। उन्होंने लिखा, "मैं आज एक अलग सुरक्षित क्षेत्र में बैठकर आप सभी की याद कर रहा हूँ। आपके मासूम चेहरे मेरे सामने जीवंत हैं। बच्चों की मासूम हंसी मेरे दिल को गहराई से छूती है।" उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ रहना हमेशा उन्हें संतुष्टि और उत्साह देता रहा है। इस दौरान उन्होंने भावुक अंदाज में अपने दिल की गहराई से जुड़े विचार साझा किए।
पिता न बन पाने का दर्द
ओली ने पत्र में अपने व्यक्तिगत दर्द को भी उजागर किया। उन्होंने लिखा कि देश में शासन परिवर्तन की लड़ाई के दौरान उन्होंने अपने बच्चों का पिता बनने का सुख नहीं पाया। उन्होंने कहा, "जब मुझे पता चला कि पुलिस की गोलियों से मेरे बेटे-बेटियों की जान चली गई, तो मेरी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया। यह दर्द आज भी ताजा है।" इसके बावजूद उन्होंने समाज में शांति बनाए रखने की अपनी कसम को नहीं छोड़ा।
Gen-Z पर निशाना, साजिश का आरोप
पत्र में ओली ने स्पष्ट किया कि हाल के प्रदर्शनों में हुई हिंसा उनके युवाओं के हाथों से नहीं हुई। उन्होंने कहा, "यह साजिश है, मासूम चेहरों को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश की जा रही है। महत्वपूर्ण रिकॉर्ड ऑफिसों में आग लगाना और जेलों से कैदियों को छोड़ना संयोग नहीं, बल्कि गहरी साजिश का हिस्सा है।" उन्होंने समाज को मजबूत रखने की अपनी जिम्मेदारी दोहराई और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया।
भारत से सीमा विवाद और भगवान राम का जन्मस्थान
ओली ने लिखा कि वह जिद्दी स्वभाव के हैं। इसी जिद की वजह से उन्होंने नेपाल का संशोधित नक्शा संयुक्त राष्ट्र को भेजा और लिपुलेख, कालापानी व लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए लिया गया था। साथ ही, उन्होंने कहा कि भगवान राम का जन्म स्थान भारत में नहीं, बल्कि नेपाल में था। इस विवादित बयान ने पहले भी भारत और नेपाल में तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न की थी।