Nepal Flood --नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद कई इलाकों में हालात मुश्किल बने हुए हैं। इस बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत की ओर से मिल रही मदद को लेकर आभार जताया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत मदद के लिए सबसे आगे खड़ा है। खनाल के मुताबिक, नेपाल में लापता 500 से अधिक विदेशी नागरिकों में करीब 300 भारतीय नागरिक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वह व्यक्तिगत तौर पर दुनिया के अलग-अलग देशों की सरकारों के संपर्क में भी रहे हैं।
500 से ज्यादा विदेशी नागरिक लापता
बाढ़ के कारण नेपाल में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्री ने बताया कि लापता विदेशियों की संख्या 500 से अधिक है, जिनमें भारतीय नागरिकों की संख्या करीब 300 बताई गई है। इस स्थिति को देखते हुए अलग-अलग स्तर पर राहत और तलाश का काम जारी है। आपदा के बीच नेपाल सरकार दूसरे देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है, ताकि प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।
जेन-जी आंदोलन से बदली नेपाल की राजनीति
नेपाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए शिशिर खनाल ने जेन-जी आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के पीछे जेन-जी आंदोलन की बड़ी भूमिका रही है। पिछले साल हुए प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया और केपी शर्मा की सरकार के गिरने के बाद नए चुनाव हुए। इसके बाद बालेन शाह के नेतृत्व में नई राजनीतिक व्यवस्था सामने आई। खनाल के मुताबिक, युवाओं की सक्रियता ने नेपाल की राजनीति को नई दिशा दी है।
भारत-नेपाल सीमा विवाद पर क्या बोले खनाल
भारत के साथ सीमा विवाद के सवाल पर नेपाल के विदेश मंत्री ने इसे दो पड़ोसी देशों के बीच होने वाली स्वाभाविक चुनौती बताया। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क जरूरी है। उनका कहना था कि पिछले कुछ महीनों में भारत और नेपाल के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत और संपर्क की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। उनके मुताबिक, मजबूत संवाद दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
नेपाल की अपनी आवाज और भविष्य पर चर्चा
इस बातचीत के दौरान नेपाल की विदेश नीति, बदलती राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज और भारत के साथ संबंधों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत बाढ़ पीड़ितों की याद में एक मिनट का मौन रखकर की गई। इसमें नेपाल के भविष्य और क्षेत्र में उसकी भूमिका को लेकर भी विचार साझा किए गए। विदेश मंत्री ने इस तरह की बातचीत को नेपाल के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि नेपाल को केवल दूसरे देशों के नजरिए से नहीं, बल्कि उसकी अपनी सोच, आकांक्षाओं और भविष्य की योजनाओं के साथ समझना जरूरी है।