Nepal Flood Reconstruction : नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच सरकार ने राहत और बचाव अभियान को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा कि फिलहाल उन लोगों को सुरक्षित निकालने पर पूरा ध्यान है जो अब भी प्रभावित इलाकों में फंसे हुए हैं। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे कर्मचारी और अन्य लोग भी शामिल हैं। नेपाली सेना अब तक 1,930 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा चुकी है, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
कटे हुए इलाकों तक पहुंचाना चुनौती
सरकार के सामने दूसरी बड़ी चुनौती उन क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने की है जो बाढ़ और भूस्खलन के कारण बाकी देश से कट गए हैं। धुनचे, रसुवा और स्याफ्रू बेसी जैसे इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने से राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में प्रशासन वैकल्पिक माध्यमों से भोजन, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता मिल सके।
बहते शवों ने बढ़ाई चिंता
बाढ़ के कारण कई लोगों की जान भी गई है। स्वर्णिम वागले ने कहा कि एक बड़ी चिंता उन शवों को ढूंढने और उनकी पहचान करने की है जो तेज बहाव के साथ चितवन और नवलपुर की ओर बह गए हैं। कुछ शवों के सीमा पार तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां खोज अभियान में जुटी हुई हैं।
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अब शुरू होगा रिकवरी का दौर
वित्त मंत्री के मुताबिक, राहत और बचाव के बाद अगला चरण शुरुआती रिकवरी का होगा। इसके तहत प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय बनाए जाएंगे और "काम के बदले नकद" जैसी योजनाएं शुरू की जाएंगी, ताकि लोगों को रोजगार और आर्थिक मदद दोनों मिल सके। सरकार का मानना है कि इससे प्रभावित समुदायों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिलेगी।
पुनर्निर्माण होगा सबसे कठिन
स्वर्णिम वागले ने माना कि सबसे कठिन काम पुनर्निर्माण का होगा। बाढ़ से सड़कों, पुलों, घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में पुनर्निर्माण के लिए बड़े संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पड़ेगी। सरकार अभी से इस दिशा में योजनाएं तैयार कर रही है।
भारत समेत पड़ोसी देशों से सहयोग
अंतरराष्ट्रीय मदद को लेकर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि नेपाल निश्चित रूप से सहयोग स्वीकार करेगा। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत ने पहले भी 2015 के भूकंप के दौरान महत्वपूर्ण सहायता दी थी और इस बार भी राहत सामग्री भेजी है। वागले के अनुसार, पुनर्निर्माण कार्यों के लिए भारत समेत कई पड़ोसी देशों से उदार सहयोग मिलने के संकेत हैं, जो नेपाल को इस आपदा से उबरने में मदद करेगा।