आगामी 5 मार्च को नेपाल की जनता अपनी सरकार चुनने के लिए वोट डालेगी। 16 फरवरी से चुनावी अभियान जारी है। चुनाव प्रचार से जुड़ी गतिविधियां चुनाव की तारीख से तीन दिन पहले खत्म हो जाएंगी। नई सरकार बनेगी और उसके साथ ही कई सवालों के जवाब भी तलाशे जाएंगे। यह चुनाव 2008 में राजशाही की समाप्ति के बाद नेपाल के सबसे अहम चुनावों में गिना जा रहा है।
2008 में नेपाल आधिकारिक तौर पर राजशाही से गणराज्य बना था, जब नेपाल को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। उसके बाद से देश लगातार राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन सरकारों और भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझता रहा है।
ओली की सरकार को गिरा दिया
यह चुनाव पिछले साल हुए युवाओं के नेतृत्व वाले जेन जी एंटी-करप्शन प्रदर्शनों के बाद हो रहा है, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिरा दिया और संसद भंग करने की नौबत ला दी। सितंबर 2025 के ये प्रदर्शन नेपाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माने जा रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए संगठित इस आंदोलन में युवाओं ने जवाबदेही, पारदर्शिता और आर्थिक सुधार की मांग की।
युवा वोट नतीजे को अहम बनाएंगे
प्रदर्शनकारियों ने जवाबदेही, पारदर्शिता और आर्थिक सुधार की मांग की। इस आंदोलन में शामिल रहे कई लोग पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उम्मीदवार नेपाल की युवा आबादी की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करने की सोच के साथ मैदान में हैं। उनका मानना है कि 2022 से अब तक लगभग दस लाख नए वोटर्स रजिस्टर हुए हैं, और युवा वोट नतीजे को अहम बना सकते हैं।
35 साल के इंजीनियर बालेन रैपर से राजनीतिज्ञ बने
मुख्य दावेदारों में काठमांडू के पूर्व मेयर, 35 साल के बालेंद्र शाह हैं, जिन्हें “बालेन” के नाम से जाना जाता है। वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रतिनिधि हैं, जिसे पूर्व टेलीविजन प्रस्तोता रबी लामिछाने ने 2022 में शुरू किया था। 35 साल के इंजीनियर बालेन रैपर से राजनीतिज्ञ बने हैं और माना जाता है कि इनकी युवाओं के बीच पकड़ अच्छी है। इन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पर भी प्रोजेक्ट किया जा रहा है और वे ओली के खिलाफ झापा-5 चुनाव क्षेत्र में उनके सामने हैं।