मैगी और किटकैट जैसी मशहूर चीजें बनाने वाली नेस्ले इस वक्त दुनिया भर में बड़े संकट का सामना कर रही है। कंपनी ने बच्चों के दूध और न्यूट्रिशन से जुड़े कई प्रोडक्ट्स को अलग-अलग देशों से वापस मंगाने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब माता-पिता शिशु आहार को लेकर पहले से ही बेहद सतर्क रहते हैं। जैसे ही यह खबर सामने आई, यूरोप से लेकर अन्य देशों तक चिंता का माहौल बन गया।
25 देशों में रिकॉल, सैकड़ों प्रोडक्ट प्रभावित
नेस्ले ने जानकारी दी है कि यह रिकॉल यूरोप, तुर्की और अर्जेंटीना समेत करीब 25 देशों में बेचे गए कुछ खास बैचों पर लागू होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 से ज्यादा फैक्ट्रियों में बने 800 से अधिक प्रोडक्ट्स इस कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। कंपनी के इतिहास में इसे अब तक का सबसे बड़ा रिकॉल माना जा रहा है, जिससे नेस्ले की साख पर भी सवाल उठने लगे हैं।
किस वजह से उठाया गया बड़ा कदम
कंपनी के अनुसार, एक बड़े सप्लायर से मिले कच्चे माल में क्वालिटी की समस्या सामने आई थी। इसी दौरान यह आशंका जताई गई कि कुछ बैचों में एक जहरीला तत्व मिल सकता है। इसके बाद नेस्ले ने एहतियातन जांच तेज की और प्रभावित प्रोडक्ट्स को बाजार से हटाने का फैसला लिया। फिलहाल कंपनी यह दावा कर रही है कि इन उत्पादों से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है।
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क्या हो सकते हैं बच्चों में लक्षण
स्वास्थ्य एजेंसियों ने बताया है कि जिस जहरीले तत्व की आशंका जताई जा रही है, उससे उल्टी, मतली और पेट में तेज ऐंठन जैसे लक्षण हो सकते हैं। चिंता की बात यह है कि यह तत्व दूध को उबालने या गर्म पानी से तैयार करने पर भी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि माता-पिता को खास सावधानी बरतने और बताए गए बैच नंबर वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है।
नेस्ले के कारोबार पर असर
इस रिकॉल का असर नेस्ले के शेयरों पर भी साफ दिखा है। पिछले दो दिनों में कंपनी के शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। शिशु पोषण बाजार में नेस्ले की हिस्सेदारी काफी बड़ी मानी जाती है और यही वजह है कि यह मामला निवेशकों के लिए भी चिंता का कारण बन गया है। कंपनी अपने सप्लाई सिस्टम को दोबारा दुरुस्त करने की बात कह रही है।
आगे क्या करने जा रही है कंपनी
नेस्ले का कहना है कि वह प्रभावित बैचों की पूरी जांच कर रही है और सप्लाई में रुकावट कम करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। कंपनी ने ग्राहकों से अपील की है कि वे जारी की गई सूची जरूर देखें और संदिग्ध प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि बच्चों के खाने से जुड़ी छोटी सी चूक भी वैश्विक स्तर पर कितना बड़ा असर डाल सकती है।