Pahalgam Attack Case: पहलगाम आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। जम्मू की विशेष NIA अदालत से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बाद अब उसे अदालत का समन पाकिस्तान के लाहौर में तामील कराने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए कूटनीतिक माध्यम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। हाफिज सईद फिलहाल पाकिस्तान में है और उसे भारत लाना आसान नहीं है।
पूरक चार्जशीट में साजिश का मास्टरमाइंड बताया
NIA ने जुलाई 2026 में दाखिल पूरक चार्जशीट में हाफिज सईद को पहलगाम हमले की साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया है। जांच एजेंसी के अनुसार, हमले की योजना तैयार करने और उसे अंजाम तक पहुंचाने की निगरानी में सईद की अहम भूमिका थी। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने सईद समेत अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर कई तथ्य अदालत के सामने रखे हैं।
8 जुलाई को जारी हुआ था गैर-जमानती वारंट
जम्मू की विशेष NIA अदालत ने 8 जुलाई को हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, सईद पाकिस्तान में मौजूद है और फिलहाल उसे भारत लाकर अदालत में पेश करना संभव नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के कारण आरोपी को भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया भी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में NIA अब उपलब्ध कानूनी विकल्पों के जरिए मामले को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
BNSS के तहत गैरमौजूदगी में ट्रायल का विकल्प
हाफिज सईद के खिलाफ उसकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की दिशा में भी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 में निर्धारित परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर ऐसे आरोपी के खिलाफ अनुपस्थिति में सुनवाई का प्रावधान है, जो जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया से बच रहा हो। इसके लिए आरोपी को अदालत में पेश होने के लिए समन और वारंट जारी करने समेत कई निर्धारित चरण पूरे करने होते हैं। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
लाहौर में समन तामील कराने की कोशिश
NIA का लाहौर में समन भेजने का प्रयास मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत के रिकॉर्ड में यह दर्ज हो कि आरोपी को कानूनी तौर पर अपना पक्ष रखने और अदालत के सामने पेश होने का अवसर दिया गया था। यदि इसके बावजूद वह पेश नहीं होता है और बाकी कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो उसकी गैरमौजूदगी में ट्रायल आगे बढ़ाने का रास्ता मजबूत हो सकता है। इससे पहलगाम हमले की साजिश में उसकी कथित भूमिका को लेकर भारत की न्यायिक प्रक्रिया जारी रह सकेगी।