यूरोप की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 38 वर्षीय रॉब जेटन ने 24 फरवरी को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालकर इतिहास रच दिया। वे देश के सबसे कम उम्र के और पहले खुले तौर पर गे प्रधानमंत्री बने हैं। उनकी ताजपोशी को वैश्विक स्तर पर उदार राजनीति की दिशा में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
117 दिन की बातचीत के बाद बनी सरकार
कड़े राजनीतिक मंथन और 117 दिनों की बातचीत के बाद जेटन ने अपनी पार्टी D66 के साथ मिलकर CDA और VVD के साथ गठबंधन सरकार बनाई। 150 सीटों वाली संसद में इस गठबंधन के पास 66 सीटें हैं। यह बहुमत से कम है, लेकिन समर्थन के आधार पर सरकार का गठन किया गया है।
जेटन इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री Mark Rutte की सरकार में डिप्टी पीएम और जलवायु व ऊर्जा नीति मंत्री रह चुके हैं।
मोदी की बधाई, भारत-नीदरलैंड संबंधों पर जोर
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जेटन को बधाई देते हुए कहा कि भारत और नीदरलैंड विविध क्षेत्रों में विस्तारित संबंध साझा करते हैं। उन्होंने लोगों के बीच बढ़ते संपर्क और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
वहीं विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी अपने समकक्ष टॉम ब्रेडेनसन को शपथ ग्रहण पर शुभकामनाएं दीं।
सेमीकंडक्टर, एआई और आर्थिक सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग
भारत और Netherlands के बीच सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्थिक सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है। जेटन ने चुनाव प्रचार के दौरान नीदरलैंड को फिर से यूरोप के केंद्र में लाने की बात कही थी।
उन्होंने कड़े मुकाबले में Geert Wilders की अगुवाई वाली पार्टी PVV को मामूली अंतर से हराया था।
80 हजार भारतीयों का मजबूत डायस्पोरा
दिल्ली स्थित नीदरलैंड की राजदूत Marisa Gerards के मुताबिक, यूरोपीय संघ के देशों में नीदरलैंड में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या है। करीब 80 हजार भारतीय मूल के लोग वहां रहते हैं, जिनमें छात्र और तकनीकी पेशेवर शामिल हैं।
इनमें से बड़ी संख्या 19वीं सदी में बिहार और उत्तर प्रदेश से सूरीनाम के रास्ते वहां पहुंची थी। यही समुदाय आज दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत कड़ी बना हुआ है।
बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत
रॉब जेटन का खुले तौर पर अपनी पहचान के साथ नेतृत्व संभालना वैश्विक राजनीति में बदलते उदारवादी रुझान का प्रतीक माना जा रहा है। उनका निजी जीवन चुनावी मुद्दा नहीं बना, जो सामाजिक स्वीकार्यता में आए बदलाव को दर्शाता है।
इस साल प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड दौरे की भी संभावना है, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा मिल सकती है।