Delhi Private School: दिल्ली सरकार ने स्कूलों की मनमानी फीस वसूली को कम करने को लेकर का नया नियम लागू कर दिया है। सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के तहत फीस का एक नया और सख्त स्ट्रक्चर जारी किया है। नए नियम के तहत अब स्कूल वाले रजिस्ट्रेशन और कॉशन मनी के नाम पर मोटी रकम नहीं वसूल पाएंगे। नए नियमों से पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) ने बहुप्रतीक्षित ‘दिल्ली स्कूल एजुकेशन (पारदर्शिता और फीस नियमन) अधिनियम-2025’ को आधिकारिक तौर पर गजट में प्रकाशित कर दिया है।
शिकायत के लिए होगी 15 फीसद अभिभावकों की जरुरत
आपको बता दें कि नए कानून के तहत किसी भी स्कूल के 15 प्रतिशत अभिभावकों की शिकायत पर बढ़े हुए फीस को कम किया जा सकेगा। यह नया और सख्त कानून दिल्ली के 1,500 से अधिक मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर लागू होगा। इस अधिनियम के तहत स्कूल फीस में किसी भी तरह की वृद्धि के लिए ‘फीस कमेटी’ से अनिवार्य रूप से मंजूरी लेनी होगी। स्कूलों को हर शैक्षणिक वर्ष के लिए फीस वृद्धि का प्रस्ताव करते समय अपने पूरे बजट का पारदर्शी विवरण भी कमेटी के सामने प्रेजेंट करना होगा। इन नए कानून के तहत तीन स्तर की निगरानी व्यवस्था होगी।
स्कूल स्तरीय फीस रेगुलेशन कमेटी
इस कमेटी का काम फीस निर्धारण की निगरानी करना होगा। साथ ही एकेडमिक ईयर के लिए लाए गए फीस स्ट्रक्चर को अप्रूव करना होगा। स्कूल स्तरीय कमेटी में 5 अभिभावक, 3 शिक्षक, प्रबंधन प्रतिनिधि और प्रिंसिपल का होना अनिवार्य होगा।
जिला स्तर फीस अपीलेट कमेटी
इस कमेटी में अभिभावक स्कूलो में फीस को लेकर अपील कर सकेंगे। यह कमेटी शिकायतों पर विचार कर अंतिम फैसला देगी।
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रिवीजन कमेटी
इस कमेटी में किसी भी फीस विवाद की सुनवाई होगी। इस स्तर पर न केवल अंतिम निर्णय लिया जाएगा, बल्कि कानून का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के लिए जुर्माने और दंड का निर्धारण भी किया जाएगा।
जिला और रिवीजन कमेटी की भूमिका
बता दें कि जिला कमेटी हर साल 15 जुलाई तक बनेगी और कमेटी को सभी मालमों का निपटारा 30 जुलाई तक कर लेना होगा। जिला स्तर के फैसले के बाद 30-45 दिनों के भीतर अपील रिवीजन कमेटी में होगी। रिवीजन कमेटी 45 दिनों में फैसला सुनाएगी, जो अंतिम और 3 साल तक लागू रहेगा। अगर 45 दिनों में समाधान नहीं हुआ, तो केस अपने-आप अपीलेट कमेटी के पास चला जाएगा।