New Labour Codes: भारत सरकार द्वारा देशभर में चार नई श्रम संहिताएँ— वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्त संहिता 2020— लागू की जा रही हैं। इन बदलावों का लाभ देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों तक पहुँचने का अनुमान है। श्रम मंत्रालय का कहना है कि इन संहिताओं के लागू होने से देश में एक एकीकृत और आधुनिक श्रम इकोसिस्टम तैयार होगा, जिससे 15 अलग-अलग वर्गों, क्षेत्रों और प्रकार के कर्मचारियों व श्रमिकों को प्रत्यक्ष फायदा होगा।
स्थायी कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं
मंत्रालय के अनुसार, अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी को स्थायी कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएँ प्राप्त होंगी। इसमें छुट्टियाँ, मेडिकल सुविधाएँ और सामाजिक सुरक्षा लाभ पूरी तरह शामिल होंगे। साथ ही, जहां पहले ग्रेच्युटी पाने की योग्यता 5 साल सेवा पर निर्भर थी, वहीं अब एक साल की निरंतर सेवा के बाद ही कर्मचारी इसका हकदार बन सकेगा। फिक्स्ड-टर्म कर्मियों को वेतन, आय तथा सुरक्षा के मामले में भी स्थायी कर्मचारियों के बराबर दर्जा मिलेगा।
गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों का लाभ
‘गिग वर्क’, ‘प्लेटफ़ॉर्म वर्क’ और ‘एग्रीगेटर्स’ को पहली बार किसी कानून में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। एग्रीगेटर कंपनियों को अब अपने वार्षिक टर्नओवर का 1–2% हिस्सा योगदान के रूप में देना होगा, जो गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्करों को दी गई/देय राशि के अधिकतम 5% तक सीमित रहेगा। आधार से जुड़े यूनिवर्सल अकाउंट नंबर की मदद से इन श्रमिकों को मिलने वाले वेलफेयर लाभ पूरी तरह पोर्टेबल हो जाएंगे और देश के किसी भी राज्य में बिना किसी बाधा के उपलब्ध रहेंगे।
अनुबंध (Contract) कर्मचारियों को क्या लाभ मिलेगा?
फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई (FTE) की व्यवस्था से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सामाजिक सुरक्षा और कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। एक साल की लगातार सेवा के बाद इन्हें ग्रेच्युटी का अधिकार मिल जाएगा। मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी होगी कि वह अनुबंध श्रमिकों को स्वास्थ्य लाभ और सामाजिक सुरक्षा कवर उपलब्ध कराए। इसके अलावा, सभी कामगारों को साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी दी जाएगी।
महिला कर्मचारियों के लिए क्या प्रावधान हैं?
महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव को कानूनन प्रतिबंधित किया गया है और समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया गया है। महिलाओं को रात की पाली (Night Shift) तथा किसी भी प्रकार का कार्य— चाहे वह भूमिगत खनन हो या भारी मशीनरी— करने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते उनकी सहमति हो और पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की गई हो। शिकायत निवारण समितियों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की गई है। महिला कर्मचारियों के परिवार की परिभाषा में सास-ससुर को शामिल करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिससे डिपेंडेंट कवरेज व्यापक और समावेशी बन सके।