राम नगरी अयोध्या की प्रसिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी मंदिर ने सभी लड्डू प्रसाद की बिक्री करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. हनुमानगढ़ी का यह फैसला भक्तों की भावना की रक्षा, प्रसाद की सच्चाई और मंदिर की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम है. अब भक्तों को यह भरोसा रहेगा कि उनके सामने परोसा गया प्रसाद शुद्ध है और उसकी जानकारी उनकी पहुँच में स्पष्ट रूप से उपलब्ध है. इस आदेश का उद्देश्य भक्तों को उच्च गुणवत्ता वाला प्रसाद उपलब्ध कराना और विक्रेताओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है.
क्या है नया आदेश?
1. गुणवत्ता स्पष्ट होनी चाहिए
सभी लड्डू प्रसाद की गुणवत्ता स्पष्ट होनी चाहिए, इसमें विशेष रूप से देसी घी का प्रयोग हो, यह स्पष्ट रूप से डिब्बे पर लिखना अनिवार्य होगा.
2. विक्रेता का नाम उजागर करें
सभी विक्रेताओं को अपने-अपने डिब्बों पर दुकान या विक्रेता का नाम दर्ज करना होगा, ताकि गुणवत्ता की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके.
बता दें कि लगभग एक साल पहले मंदिर परिषद ने तय किया था कि प्रसाद में केवल देसी घी का प्रयोग होगा. बावजूद इसके कुछ बाहरी विक्रेताओं द्वारा रिफाइंड तेल और मिलावटी सामग्री का उपयोग जारी रहा. इस संदर्भ में हनुमानगढ़ी के पांचों प्रमुख महंतों ने बैठक कर यह कड़े निर्देश जारी करने का निर्णय लिया.
कानूनी कार्रवाई का खतरा
आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. मिलावटी प्रसाद या गलत जानकारी देने पर प्रशासन और मंदिर प्रबंधन जुर्माना की कार्रवाई तक कर सकते हैं.
10 जुलाई से विशेष उत्सव
वहीं कन्ट्रोल रूम और प्रसाद मंडियों को एक दिशा दी गई है. 10 जुलाई से शुरू हो रहे सावन झूला मेले के दौरान इस नियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भी कांवड़ मार्गों के सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सतर्क है और सभी दुकानदारों को नाम और गुणवत्ता लिखने के निर्देश जारी कर चुकी है.