मध्यप्रदेश में न्यायिक प्रक्रियाओं को आमजन के लिए और अधिक सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की न्यायश्रुति योजना के अंतर्गत राज्य के 2000 से अधिक स्थानों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) रूम स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से अब गवाहों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य पक्षों को अदालती कार्यवाही में शामिल होने के लिए कोर्ट पहुंचने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। वे अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन, एसपी ऑफिस या अन्य नामित स्थान से वीडियो के माध्यम से बयान दे सकेंगे। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि न्यायिक व्यवस्था भी अधिक त्वरित और डिजिटल रूप में सशक्त होगी। यह योजना तकनीक के माध्यम से न्यायिक पहुंच को लोकतांत्रिक और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
2000 VC रूम्स से बदलेगी न्यायिक प्रक्रिया की तस्वीर
न्यायश्रुति योजना के तहत मध्यप्रदेश के सभी थानों, एसडीओपी/सीएसपी कार्यालयों और एसपी ऑफिसों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं से लैस किया जाएगा। प्रत्येक लोकेशन पर VC सिस्टम, कंप्यूटर और हाई-स्पीड 100 Mbps इंटरनेट कनेक्शन की व्यवस्था की जाएगी। इस योजना के पहले चरण को अगले 6 महीनों में जमीन पर उतारने की तैयारी है।
गवाहों और सरकारी कर्मचारियों को नहीं उठाना पड़ेगा कोर्ट तक का सफर
अक्सर देखा गया है कि ट्रांसफर हो जाने वाले सरकारी कर्मचारी या दूरदराज के गवाह अदालती कार्यवाही में समय पर शामिल नहीं हो पाते। VC रूम्स की सुविधा से अब ये लोग अपने वर्तमान स्थान से ही सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। इससे न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी और मामलों के लंबित रहने की समस्या में भी कमी आएगी।
केंद्र सरकार दे रही आर्थिक सहायता
इस परियोजना को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार प्रति स्थान दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता राज्य को प्रदान कर रही है। इसका उपयोग VC रूम्स की तकनीकी जरूरतों जैसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट सेटअप के लिए किया जाएगा। यह योजना डिजिटल इंडिया मिशन के अंतर्गत न्यायिक प्रणाली के डिजिटलीकरण की दिशा में अहम पहल है।
तकनीक से जुड़ेगा आम नागरिक, न्याय होगा सुलभ
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के इस व्यापक नेटवर्क के जरिए ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी न्यायिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से जुड़ सकेंगे। यह कदम न्याय को आमजन के दरवाजे तक पहुंचाने के सपने को साकार करने जैसा है।