IIT Ropar PhD Model: आईआईटी रोपड़ (IIT Ropar) ने देश की उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में एक बहुत ही क्रांतिकारी और अनोखा बदलाव किया है। अब छात्रों को पीएचडी (PhD) की डिग्री हासिल करने के लिए वर्षों तक लंबी चौड़ी थीसिस लिखने की कोई जरूरत नहीं होगी। IIT रोपड़ ने प्रोडक्ट/स्टार्टअप-ड्रिवन पीएचडी पाथवे की शुरुआत की है। भारत के किसी भी आईआईटी में इस तरह का यह पहला और अनोखा प्रोग्राम है। इसके तहत छात्रों को मोटी किताबें या रिपोर्ट छापने के बजाय असल दुनिया की समस्याओं को हल करने, नया प्रोडक्ट बनाने या स्टार्टअप खड़ा करने के आधार पर पीएचडी की डिग्री दी जाएगी।
डिग्री पाने के 3 आसान तरीके
पेटेंट- अपने किसी अविष्कार या नई तकनीक का पेटेंट फाइल करके उसे मंजरू कराएं।
स्टार्टअप- अपनी खुद की कंपनी या स्टार्टअप शुरू करें, कोई उपयोगी प्रोडक्ट तैयार करें और उसे बाजार में बेचकर कमाई करें।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर- अपनी बनाई गई तकनीक को किसी स्थापित कंपनी (जैसे टाटा, रिलायंस या होंडा) को ट्रांसफर करें, जिससे कंपनी उससे प्रोडक्ट बनाए और आपको उसकी रॉयल्टी मिले।
10 लाख रुपये कमाओ और ले जाओ PhD की डिग्री
इस नए मॉडल के तहत शोधकर्ता को कोई भी पीएचडी थीसिस लिखने की जरूरत नहीं है। संस्थान के एसोसिट डीन सारंग गुंफेकर ने इस अनोखे नियम को बेहद सरल शब्धों में समझाते हुए कहा कि आपके पास पूरी आजादी है और केवल एक ही टारगेट है। एक प्रोडक्ट बनाइए, उसे बेचिए, 10 लाख रुपये कमाकर मुझे दिखाइए और अपनी PhD ले जाइए।
अधिकारियों ने क्या कहा?
आईआईटी रोपड़ के डायरेक्टर प्रोफेसर राजीव आहूजा और एसोसिएट डीन प्रोफेसर सारंग गुंफेकर ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक रिसर्च में केवल रिसर्च पेपर पब्लिश करने का भारी मानसिक दबाव होता है, जिससे कई बार डेटा से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आती थीं। इस नए मॉडल का उद्देश्य उस दबाव को खत्म करना है।
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कहां से मिली प्रेरणा
इस तरह की पहल हाल ही में चीन में भी देखने को मिली थी, जहां एक छात्र को केवल ब्रिज-पाइलन का प्रैक्टिक्ल प्रोडक्ट बनाने पर पीएचडी दी गई थी। भारत में BITS पिलानी के बाद अब आईआईटी रोपड़ देश का ऐसा पहला आईआईटी बन गया है, जो कागजी थीसिस के बजाय व्यावहारिक और जमीनी सफलता पर डिग्री दे रहा है।