Shiva Sharma Murder Case: शिवा शर्मा हत्याकांड की जांच में पुलिस श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश से पूछताछ कर रही है। तीनों से अलग-अलग और फिर आमने-सामने बैठाकर सवाल किए गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान गैंग के सरगना जुल्फिकार के साथ श्रद्धा के कथित संबंधों और नागपुर में उसके लिए फ्लैट की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। मामले में उत्तर प्रदेश के एक विधायक की संभावित भूमिका को लेकर भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
श्रद्धा के बैंक खाते की भी जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा दुबे के एक बैंक खाते को फ्रीज कराया गया है, जिसमें करीब छह लाख रुपये होने की जानकारी है। जांच में यह भी सामने आया है कि श्रद्धा और कथित गैंग सरगना जुल्फिकार के बीच वर्ष 2024 तक संबंध होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा, श्रद्धा के लिए कानूनी सहायता की व्यवस्था किसने की थी और नागपुर में फ्लैट का इंतजाम कैसे हुआ, पुलिस इन पहलुओं की भी जांच कर रही है।
नागपुर से गिरफ्तार कर लखनऊ लाई गईं आरोपी
श्रद्धा दुबे को 20 अक्टूबर को नागपुर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को गिरफ्तार कर लखनऊ लाया। मामले में आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पूछताछ के दौरान पुलिस हत्या से जुड़े घटनाक्रम, आरोपियों के आपसी संपर्क और कथित आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटाने में लगी है।
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9 अक्टूबर को हुई थी शिवा शर्मा की मौत
यह मामला लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र के बालू अड्डा इलाके का है। 9 अक्टूबर को एक अपार्टमेंट की बालकनी से शिवा शर्मा के नीचे गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस ने घटना को दुर्घटना मानकर जांच की थी। बाद में परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर हत्या का मामला दर्ज किया गया। इस प्रकरण में श्रद्धा की बहन रश्मि दुबे, ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश और अन्य लोगों के नाम भी सामने आए।
फरारी के दौरान वीडियो जारी कर दी थी सफाई
मामले में नाम सामने आने के बाद श्रद्धा दुबे फरार चल रही थी। इस दौरान उसके दो वीडियो सामने आए थे, जिनमें उसने शिवा शर्मा की मौत में अपनी भूमिका होने से इनकार किया था। श्रद्धा ने दावा किया था कि शिवा पर 15 से 20 लाख रुपये का कर्ज था और वह कर्ज न चुका पाने की स्थिति में अपनी जान देने की बात कहता था। पुलिस अब आरोपियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने तक किसी भी आरोप को अदालत में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता।