Drug addiction: देश के स्कूली बच्चों में नशे की लत तेजी से फैल रही है और इसके पीछे बड़ा कारण माता-पिता व परिवार के सदस्यों की नशे की आदतें हैं। एक हालिया संयुक्त अध्ययन में खुलासा हुआ है कि घर में तंबाकू या शराब का इस्तेमाल करने वाले परिवार के सदस्यों की मौजूदगी किशोरों को नशे की ओर धकेल रही है।
बच्चों पर डाल रही बडों की आदतें
अध्ययन के अनुसार करीब 40 प्रतिशत नशा करने वाले छात्रों ने बताया कि उनके घर में कोई न कोई परिवार का सदस्य तंबाकू या शराब का सेवन करता है। इससे साफ है कि बड़े लोगों की आदतें बच्चों पर गहरा असर डाल रही हैं। यह अध्ययन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर की प्रमुख डॉ. अंजू धवन के नेतृत्व में किया गया। इसमें देश के 10 बड़े शहरों - दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, लखनऊ, चंडीगढ़, हैदराबाद, इंफाल, जम्मू, डिब्रूगढ़ और रांची के सरकारी, निजी और ग्रामीण स्कूलों के कुल 5920 छात्र-छात्राओं (कक्षा 8, 9, 11 और 12) पर सर्वे किया गया। छात्रों की औसत आयु 14 से 7 वर्ष थी। यह अध्ययन हाल ही में नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में रहा केजीएमयू का योगदान
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) सहित अन्य प्रमुख संस्थानों का इसमें योगदान रहा। अध्ययन के चौंकाने वाले नतीजे बताते हैं कि 15.1 प्रतिशत किशोरों ने जीवन में कभी न कभी कोई नशीला पदार्थ आजमाया है। पिछले एक साल में 10.3 प्रतिशत और पिछले महीने में 7.2 प्रतिशत छात्रों ने नशे का सेवन किया। सबसे आम नशीले पदार्थ तंबाकू (4 प्रतिशत), शराब (3.8 प्रतिशत), ओपियोइड्स (2.8 प्रतिशत, ज्यादातर गैर-निर्धारित गोलियां), कैनाबिस (2 प्रतिशत) और इनहेलेंट्स (1.9 प्रतिशत) रहे। हैरानी की बात यह है कि नशे की शुरुआत औसतन 12-9 वर्ष की उम्र में हो रही है। कुछ मामलों में तो 11 वर्ष से भी पहले।
बडा रोल अदा कर रहा परिवार का माहौल
शोधकर्ताओं ने पाया कि परिवार का माहौल नशे की लत में बड़ा रोल अदा कर रहा है। करीब एक-चौथाई छात्रों ने परिवार में झगड़ों की बात कही, जो नशे की ओर ले जाने वाला प्रमुख कारक है। इसके अलावा पीयर प्रेशर (दोस्तों का दबाव) और आसानी से नशीले पदार्थों की उपलब्धता भी जिम्मेदार हैं। 46 प्रतिशत छात्रों का मानना है कि उनकी उम्र के बच्चों के लिए तंबाकू आसानी से मिल जाता है, जबकि 36 प्रतिशत ने शराब के लिए यही कहा।
लडकियों में बढ रहा नशे का चलन
लड़कियों में भी नशे का चलन बढ़ रहा है, खासकर भावनात्मक तनाव से निपटने के लिए। डॉ. अंजू धवन ने चेतावनी दी कि अगर मिडिल स्कूल से पहले हस्तक्षेप नहीं किया गया तो यह प्रयोग जीवनभर की लत बन सकता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि नशा करने वाले छात्रों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं ज्यादा हैं। 31 प्रतिशत में गंभीर मानसिक तनाव पाया गया, जबकि गैर-उपयोगकर्ताओं में यह 25 प्रतिशत था। दुर्भाग्यवश, मदद लेने वाले छात्र बहुत कम हैं। सिर्फ 1 प्रतिशत ने कोई सहायता मांगी।
बडा एलार्म है यह अध्ययन
विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को अपनी आदतों पर नियंत्रण रखना होगा, क्योंकि बच्चे उन्हें ही रोल मॉडल मानते हैं। परिवार में खुली बातचीत, निगरानी और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों की जरूरत है। सरकार और संस्थानों को मिलकर प्रिवेंशन प्रोग्राम चलाने चाहिए ताकि यह बढ़ती समस्या रोकी जा सके। यह अध्ययन देश में किशोरों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर एक बड़ा अलार्म है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ी गंभीर खतरे में पड़ सकती है। माता-पिता, शिक्षक और समाज को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।