संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पति-पत्नी के अलग होने की शर्तों को तय करने के लिए तालिबान के नए आदेश से न सिर्फ बाल विवाह को बढ़ावा मिल सकता है, बल्कि महिलाओं और लड़कियों के लिए हिंसक और अत्याचार भरे रिश्तों से बाहर निकलना भी बहुत मुश्किल हो सकता है।
आदेश से महिलाएं और लड़कियों का शोषण
विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल 2026 में तालिबान के नियंत्रण वाले न्याय मंत्रालय की ओर से जारी किए गए ‘पति-पत्नी के अलगाव’ से जुड़े आदेश से महिलाएं और लड़कियां शोषण और हिंसा के खतरे में आ सकती हैं। इसका असर शिया समुदाय और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों पर भी पड़ सकता है।”
आदेश बाल विवाह को मान्यता देने जैसा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश बाल विवाह को मान्यता देने जैसा लगता है। यह दिसंबर 2021 के उनके पहले आदेश के उलट है, जिसमें शादी के लिए “एक वयस्क महिला” की सहमति जरूरी बताई गई थी।
बाल विवाह को फिर से स्वीकार किया जा रहा
विशेषज्ञों ने पहले वाले आदेश का स्वागत किया था और कहा था कि पिछली सरकार के समय भी कम उम्र में शादी एक बड़ी चिंता का विषय रही थी। लेकिन नए आदेश से ऐसा लगता है कि बाल विवाह को फिर से स्वीकार किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस आदेश से अभिभावकों या संरक्षकों को अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने का ज्यादा मौका मिल सकता है। इससे लड़कियों के लिए घरेलू हिंसा की शिकायत करना या उससे बचने के लिए कदम उठाना लगभग असंभव हो सकता है।
कई सालों तक मुश्किल हालात
रिपोर्ट के अनुसार, आदेश में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनके तहत कोई लड़की शादी के बाद युवावस्था आने पर ही अलग होने की मांग कर सकती है। इसका मतलब है कि उसे शादी से पहले बचाने के बजाय उसे कई सालों तक मुश्किल हालात झेलने पड़ सकते हैं।