देश में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। 2026 से नया ट्रैफिक नियम लागू किया जा सकता है, जिसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या रद्द हो सकता है। Ministry of Road Transport and Highways एक ग्रेडेड अंक प्रणाली पर काम कर रहा है, जिसका मकसद ड्राइवरों को जिम्मेदार और अनुशासित बनाना है।
क्या है नया पॉइंट बेस्ड ट्रैफिक सिस्टम?
सरकार जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रही है, उसे ग्रेडेड अंक प्रणाली कहा जा रहा है। इस सिस्टम में हर ड्राइवर के लाइसेंस पर तय संख्या में अंक दिए जाएंगे। जब भी कोई व्यक्ति ट्रैफिक नियम तोड़ेगा, उसके लाइसेंस से अंक घटा दिए जाएंगे।
अगर किसी चालक के सभी अंक खत्म हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस छह महीने तक के लिए सस्पेंड किया जा सकता है। बार-बार गंभीर उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान भी हो सकता है।
किन गलतियों पर तेजी से कटेंगे अंक?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार ओवरस्पीडिंग, रेड सिग्नल तोड़ना, गलत दिशा में वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग करना और मोबाइल फोन का इस्तेमाल जैसे मामलों में अंक तेजी से कम हो सकते हैं।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम सीधे ड्राइवर के व्यवहार पर असर डालेगा। सिर्फ जुर्माना भरकर बच निकलने की प्रवृत्ति कम होगी, क्योंकि लाइसेंस पर असर पड़ना हर चालक के लिए गंभीर मामला होगा।
क्यों जरूरी पड़ा यह बदलाव?
भारत में हर साल बड़ी संख्या में सड़क हादसे दर्ज किए जाते हैं। इन दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह तेज रफ्तार, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना और लापरवाही से वाहन चलाना है।
सरकार का मानना है कि केवल जुर्माना बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। जरूरत है ऐसी व्यवस्था की, जो ड्राइवरों को लंबे समय तक अनुशासन में रख सके और उन्हें जिम्मेदार ड्राइविंग के लिए प्रेरित करे।
ड्राइविंग आदतों में आएगा बदलाव?
नया अंक आधारित सिस्टम ड्राइवरों की मानसिकता बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जब नियम तोड़ने का सीधा असर लाइसेंस पर पड़ेगा, तो लोग अधिक सतर्क रहेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह मॉडल कई देशों में पहले से लागू है और वहां सड़क दुर्घटनाओं में कमी देखने को मिली है। अगर 2026 में यह नियम लागू होता है, तो भारत में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव है।