Unnao Rape Case: उन्नाव रेप मामले में एक बार फिर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के इस चर्चित मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. हाई कोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया था, जिस पर अब शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप किया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेंगर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है.
CBI पर सहयोग न करने का आरोप
पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने इस दौरान जांच एजेंसी सीबीआई की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई न सिर्फ इस मामले में, बल्कि पहले भी कई संवेदनशील मामलों में जरूरी दस्तावेज और जानकारियां साझा करने से बचती रही है. महमूद प्राचा का कहना है कि उन्हें पहले से आशंका थी कि एजेंसी अहम जानकारियां छिपाएगी और वही हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि केस से जुड़ी प्रतियां आखिरी समय तक रोकी गईं, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हुई. उनके मुताबिक, ऐसी रणनीति से न्याय की राह कठिन होती है और पीड़ित पक्ष को अनावश्यक संघर्ष करना पड़ता है.
.
यह भी देखेंःIndia-Pakistan border: नए साल पर आतंकी मंसूबे बेनकाब, भारत-पाक सीमा पर बढ़ाई गई सख्ती
पीड़िता को न्याय की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पीड़ित परिवार ने संतोष जताया है. पीड़िता ने कहा कि उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है और वह अंतिम न्याय तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगी. उनका कहना है कि जब तक दोषी को फांसी की सजा नहीं मिलती, तब तक उनके परिवार को सच्चा न्याय नहीं मिलेगा. दूसरी ओर, कुलदीप सेंगर की बहन इशिता सेंगर ने सोशल मीडिया के जरिए निष्पक्ष सुनवाई की अपील की है. उन्होंने कहा कि उनका परिवार वर्षों से कानून पर भरोसा बनाए हुए है और चाहता है कि बिना किसी दबाव के, सिर्फ सबूतों के आधार पर फैसला हो.