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Interim PM in Nepal: नेपाल में जेन-ज़ी आंदोलन से उपजे राजनीतिक संकट के बीच अंतरिम प्रधानमंत्री की तलाश लगातार चर्चा में है। पहले पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की इस पद की सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही थीं, लेकिन अब उनका नाम दौड़ से बाहर हो गया है। उनकी जगह नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख कुलमान घिसिंग का नाम तेजी से उभरा है। बताया जा रहा है कि खुद जेन-ज़ी प्रदर्शनकारियों ने ही वर्चुअल मीटिंग्स और आंतरिक चर्चाओं के बाद उनका नाम आगे बढ़ाया।
क्यों पीछे हटीं सुशीला कार्की?
72 वर्षीय सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही हैं और ईमानदार छवि के कारण युवाओं में उनका सम्मान है। शुरुआत में मेयर बालेंद्र शाह समेत कई नेताओं ने उनका समर्थन भी किया। 10 सितंबर को हुई जेन-ज़ी की बड़ी मीटिंग में उनके नाम पर सहमति दिख रही थी। हालांकि, उम्र और राजनीतिक अनुभव को लेकर कुछ समूहों ने आपत्ति जताई। खुद कार्की भी यह जिम्मेदारी लेने में इच्छुक नहीं थीं। सूत्रों के मुताबिक, आर्मी चीफ ने उन्हें कई घंटों तक मनाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार उन्होंने नाम वापस ले लिया।
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कुलमान घिसिंग कैसे बने फेवरिट?
मीटिंग में विकल्प के तौर पर कुलमान घिसिंग का नाम सामने आया और उन्हें व्यापक समर्थन मिला। बिजली संकट खत्म करने और भ्रष्टाचार से दूर रहने की वजह से उन्हें “बिजली मैन” कहा जाता है। गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक दक्षता के कारण उन्हें युवाओं और सेना दोनों का भरोसा हासिल हुआ। माना जा रहा है कि घिसिंग अंतरिम दौर में स्थिरता ला सकते हैं और नए चुनाव तक संतुलन बनाए रखेंगे। यही वजह है कि अब वह नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं।