अमेरिका में करीब 50 साल बाद एक नई तेल रिफाइनरी बनने जा रही है। इस बड़े प्रोजेक्ट का ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। टेक्सास के ब्राउनसविले में बनने वाली यह रिफाइनरी काफी बड़ी मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस परियोजना पर करीब 300 अरब डॉलर खर्च किए जाएंगे। ट्रंप ने इसे अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा निवेश बताया है और कहा है कि इससे ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा।
भारत की कंपनी करेगी बड़ा निवेश
इस परियोजना की खास बात यह भी है कि इसमें भारत की बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज निवेश करने जा रही है। ट्रंप ने इस निवेश के लिए भारत और रिलायंस का धन्यवाद भी किया है। उनके अनुसार यह सौदा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेगा। ऊर्जा क्षेत्र में इतना बड़ा निवेश होने से अमेरिका में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
1977 के बाद नहीं बनी कोई बड़ी रिफाइनरी
जानकारी के मुताबिक अमेरिका में 1977 के बाद से कोई बड़ी पेट्रोलियम रिफाइनरी नहीं बनी है। उस समय मैराथन ऑयल कंपनी ने लुइसियाना के गैरीविल इलाके में एक बड़ा रिफाइनरी प्लांट शुरू किया था। उसकी क्षमता रोज करीब दो लाख बैरल तेल प्रोसेस करने की थी। इसके बाद कई सालों तक केवल कुछ छोटी रिफाइनरी ही बनीं, जिनकी क्षमता बहुत कम थी और वे बड़े स्तर पर उत्पादन नहीं कर पाती थीं।
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पुराने प्लांट को ही किया जाता रहा बेहतर
विशेषज्ञों के अनुसार नई रिफाइनरी न बनने की एक बड़ी वजह यह थी कि बड़ी कंपनियों ने पुराने प्लांट को ही बेहतर बनाना ज्यादा आसान समझा। कंपनियों ने अपने पुराने रिफाइनरी प्लांट में सुधार करके उत्पादन बढ़ा लिया। इससे उन्हें नया प्लांट बनाने की जरूरत कम महसूस हुई। इसी तरीके से कई दशकों तक अमेरिका अपनी तेल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करता रहा।
मांग घटने का भी था अंदेशा
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि कंपनियों को आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की मांग कम होने का अंदेशा था। इसलिए वे बड़े और महंगे प्रोजेक्ट शुरू करने से बचती रहीं। इसके अलावा नई रिफाइनरी बनाने के लिए लंबी सरकारी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें काफी समय और पैसा लगता है। इसी कारण कई कंपनियां नए प्लांट लगाने के बजाय पुराने सिस्टम से ही काम चलाती रहीं।
ग्रीन ऊर्जा की ओर बढ़ रहा था ध्यान
एक और वजह यह भी रही कि अमेरिका और कई पश्चिमी देश धीरे धीरे ग्रीन ऊर्जा की ओर बढ़ रहे थे। सरकारें जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की योजना बना रही थीं। इसी वजह से कंपनियों ने नए तेल प्रोजेक्ट शुरू करने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। हालांकि 2022 में तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद ऊर्जा बाजार की स्थिति बदली और अब फिर से नई रिफाइनरी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।