भारतीय जनता पार्टी को नया अध्यक्ष मिल चुका है। नितिन नवीन को पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही पार्टी के संगठनात्मक भविष्य की दिशा भी तय होती दिख रही है। भाजपा का अध्यक्ष पद केवल एक औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सख़्त फैसलों, त्याग, अनुशासन और बड़े राजनीतिक बदलावों का केंद्र रहा है। इस लेख में जानते हैं भाजपा के पूर्व अध्यक्षों से जुड़े 5 चर्चित किस्से और नए अध्यक्ष के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियां।
नितिन नवीन: सबसे युवा अध्यक्ष और सबसे बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा ने नितिन नवीन को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। पहले उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी, अब चुनावी औपचारिकताओं के बाद वे पूर्णकालिक अध्यक्ष बन गए हैं। नितिन नवीन भाजपा के अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष माने जा रहे हैं। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है, ऐसे में 2029 का लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जाना तय माना जा रहा है। इससे पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होंगे, जो उनके लिए बड़ी संगठनात्मक परीक्षा साबित होंगे।
कुशाभाऊ ठाकरे: सादगी जिसकी पहचान बनी
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे की सादगी आज भी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए मिसाल है। दो जोड़ी कपड़े, छोटा सा बक्सा और लगातार यात्राएं—यही उनका जीवन था। उन्होंने निजी जीवन में विवाह नहीं किया और पार्टी के लिए पूरी तरह समर्पित रहे। 75वें जन्मदिन पर मिली बड़ी धनराशि को उन्होंने सामाजिक कार्यों के लिए दान कर दिया। उनके कार्यकाल में भाजपा की पहली पूर्णकालिक गठबंधन सरकार बनी, जिसे संगठनात्मक सफलता माना जाता है।
जब एक एसयूवी से ज्यादा अहम बनी कार्यकर्ताओं की बस
कुशाभाऊ ठाकरे से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बताता है कि एक व्यापारी ने उन्हें महंगी एसयूवी भेंट की थी। ठाकरे ने सवाल किया—इसमें कितने कार्यकर्ता बैठेंगे? जवाब मिला—पांच। उन्होंने तुरंत कहा कि गाड़ी बेचकर दो बसें खरीदो, ताकि ज्यादा कार्यकर्ता रैलियों में जा सकें। यह किस्सा भाजपा की जमीनी राजनीति और संगठन-केंद्रित सोच को दर्शाता है।
अमित शाह: संगठन में रात तीन बजे की सख़्ती
भाजपा के एक पूर्व अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह का कार्यकाल संगठनात्मक विस्तार के लिए जाना जाता है। सदस्यता अभियान के दौरान वे रियल टाइम आंकड़ों पर नजर रखते थे। एक जिले में सुस्त सदस्यता देखकर उन्होंने आधी रात के बाद सीधे जिला अध्यक्ष को फोन कर जवाब तलब किया। यह घटना दिखाती है कि भाजपा में संगठनात्मक अनुशासन किस स्तर तक लागू किया जाता है।
बंगारू लक्ष्मण: आधी रात का संकट और सुबह से पहले इस्तीफा
भाजपा के इतिहास का सबसे विवादास्पद अध्याय बंगारू लक्ष्मण से जुड़ा रहा। एक स्टिंग ऑपरेशन में फंसने के बाद पार्टी की नैतिक छवि पर सवाल खड़े हो गए। आधी रात में आपात बैठक हुई और सुबह होने से पहले उनसे इस्तीफा ले लिया गया। यह घटना बताती है कि भाजपा अपने अध्यक्ष पद को लेकर कितनी सख़्त नीति अपनाती रही है।
नितिन नवीन के सामने आगे की राह
नितिन नवीन के कार्यकाल में परिसीमन, महिला आरक्षण और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे बड़े बदलावों की संभावनाएं हैं। इसके साथ ही करीब दो दर्जन राज्यों में विधानसभा चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा होंगे।