भारत में सबसे अधिक ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) से प्रभावित लोग है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, भारत में हर तीन मिनट में दो लोगों की मौत टीबी के कारण हो रही है। टीबी को लेकर भारत सरकार द्वारा कई अभियान चलाए जा रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। समय पर इलाज और उचित देखभाल के साथ, टीबी से छुटकारा पाया जा सकता है। WHO की 'ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट 2024' के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच भारत में टीबी मामलों में 17.7% की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत 8.3% की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है।
टीबी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है.....
पल्मोनरी टीबी....
पल्मोनरी टीबी को फेफड़ों की टीबी भी कहा जाता है। 70 से 75% मरीजों में पल्मोनरी टीबी होती है। इसके मुख्य लक्षण खांसी आना, बलगम आना, बलगम में खून आना, सीने में दर्द, थकान कमजोरी या बुखार आना हैं।
एक्सट्रापल्मोनरी टीबी....
एक्सट्रापल्मोनरी टीबी फेफड़ों के अलावा शरीर अन्य भागों को प्रभावित कर सकती है। एक्सट्रापल्मोनरी टीबी ब्रेन में, इसमें पीड़ित को सिरदर्द या चक्कर आने की समस्या हो सकती है। वहीं रीढ़ की हड्डी की टीबी में लगातार पीठ दर्द की समस्या हो सकती है। इस तरह के 20 से 25% मामले सामने आते हैं।
किन लोगों को टीबी से ग्रसित होने का खतरा अधिक रहता है?
जिन लोगों को डायबिटीज, एड्स (AIDS) जैसी पुरानी बीमारियां हैं या जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, उन लोगों में टीबी होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा टीबी पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने से टीबी की बीमारी फैल सकती है, जब कोई अन्य व्यक्ति अपने आस-पास से इसे सांस लेता है, तो वो भी टीबी से संक्रमित हो जाते हैं। अगर समय रहते टीबी की पहचान और इलाज न किया जाए तो यह गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
टीबी का इलाज संभव है...
टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसका पूरा कोर्स करना जरूरी है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। टीबी के मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत ₹500 प्रति माह पोषण सहायता भी दी जाती है।