देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टोल शुल्क तय करने के नियमों में बदलाव किया है। नए फॉर्मूले के तहत ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर और एलिवेटेड सेक्शन वाले कई हाईवे पर यात्रियों को पहले की तुलना में कम टोल देना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद सफर को अधिक किफायती बनाना है।
क्या है नया टोल फॉर्मूला?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए नियम के अनुसार, जिन राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्वतंत्र ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड हाईवे बने हैं, वहां टोल की दूरी दो अलग-अलग तरीकों से तय की जाएगी। इसके बाद जो दूरी कम होगी, उसी के आधार पर टोल शुल्क लिया जाएगा। इससे कई मार्गों पर यात्रियों का खर्च कम हो सकता है।
पहले कैसे तय होता था टोल?
अब तक ऐसे हाईवे और एलिवेटेड सेक्शन पर टोल की गणना सामान्य सड़क की तुलना में अधिक दूरी मानकर की जाती थी। हाईवे निर्माण की लागत और कुल दूरी के आधार पर प्रति किलोमीटर टोल तय किया जाता था। वहीं कार और जीप जैसे हल्के वाहनों की तुलना में बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों से अधिक शुल्क लिया जाता है।
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किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
नए नियम का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जो रोजाना राष्ट्रीय राजमार्गों का इस्तेमाल करते हैं। खासकर लंबे फ्लाईओवर, टनल और एलिवेटेड कॉरिडोर वाले रूट पर सफर करने वाले वाहन चालकों का टोल खर्च कम हो सकता है। इससे ट्रांसपोर्ट कंपनियों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत घटने की भी संभावना है।
कहां लागू होगा नया नियम?
यह नया फॉर्मूला केवल उन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगा, जहां एक या अधिक ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड सेक्शन मौजूद हैं। सामान्य हाईवे पर टोल वसूली की व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।
क्या सभी हाईवे पर टोल कम होगा?
नहीं। नया नियम सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू नहीं होगा। केवल उन्हीं मार्गों पर टोल शुल्क में बदलाव होगा, जहां टोल की गणना नए फॉर्मूले के दायरे में आती है। ऐसे में हर हाईवे पर टोल कम होने की संभावना नहीं है।