Delhi Blast: फरीदाबाद और आसपास के इलाकों में NIA व पुलिस की छापेमारी ने एक ऐसे गुप्त आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। जांच में सामने आया कि यह मॉड्यूल पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोगों का समूह था, जो अत्याधुनिक तरीके से काम करता था। सबसे चौंकाने वाली बात—इस पूरे नेटवर्क की आड़ में ‘कश्मीरी फलों का बिज़नेस’ का सहारा लिया गया था।
क्या कश्मीरी फल सिर्फ एक कवर स्टोरी थे?
NIA की जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी मुज़म्मिल ने फरीदाबाद के खोरी जमालपुर गांव में एक घर और खेत के कमरे को यह कहकर किराए पर लिया था कि वह कश्मीरी फलों का व्यापार शुरू करना चाहता है। घर के मालिक जुम्मा खान ने बताया कि मुज़म्मिल को देखकर कभी शक नहीं हुआ—शांत, पढ़ा-लिखा और विनम्र स्वभाव का लगने वाला शख्स। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि यहीं लगभग 12 दिनों तक भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जमा की गई थी।
क्यों लगातार ठिकाने बदल रहा था मुज़म्मिल?
NIA की जांच बताती है कि मुज़म्मिल एक जगह ज्यादा देर नहीं रहता था। अप्रैल से जुलाई तक वह अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास एक फैक्ट्री के ऊपर वाले कमरे में रहा, जहां वह 8,000 रुपये महीने किराया देता था। तीन महीने बाद उसने गर्मी का बहाना बनाकर कमरा खाली कर दिया।
अब एजेंसियों का शक है कि असली कारण बारूद और विस्फोटक सामग्री को बार-बार शिफ्ट करना था, ताकि किसी को भनक न लगे।
12 दिन तक छिपा विस्फोटक
NIA को मिले सबूत बताते हैं कि खेत के कमरे में जमा विस्फोटक बाद में फतेहपुर तगा गांव में मौलवी इश्तियाक के घर ले जाया गया। यह पूरी प्रक्रिया बताती है कि यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक संगठित टीम का था, जो बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही थी।
दो और गुप्त ठिकाने
धौज और फतेहपुर तगा में पहले से किराए पर लिए गए दो कमरों के अलावा NIA को अब दो और गुप्त ठिकानों के सबूत मिले हैं।
जांच एजेंसियों का अनुमान है कि मुज़म्मिल अकेला नहीं था, बल्कि एक पढ़े-लिखे आतंकियों की टीम—‘व्हाइट-कॉलर मॉड्यूल’—इसमें शामिल थी। फरीदाबाद में हुई रेड में 2,900 किलो विस्फोटक बरामद हुआ, जो किसी बड़े हमले की तैयारी की ओर इशारा करता है।
व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल?
पूरी जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि इस मॉड्यूल में शामिल लोगों में तीन MBBS डॉक्टर भी थे—यानी दिखने में सभ्य, शिक्षित, लेकिन अंदर से गहरे आतंकी एजेंडा वाले लोग। मुज़म्मिल के साथ डॉक्टर भी गिरफ्तार हुए। गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद लाल किले के पास डॉ. उमर की i20 कार में हुआ धमाका—जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई—ने एजेंसियों को और सतर्क कर दिया।
दिल्ली ब्लास्ट—क्या यह 'सबूत मिटाने' की कोशिश थी?
NIA को अब शक है कि मुज़म्मिल की गिरफ्तारी के बाद किया गया यह विस्फोट किसी सबूत मिटाने, या पूरी साजिश को मोड़ने की कोशिश भी हो सकता है। i20 कार में हुआ धमाका इतना अचानक था कि इसे योजना के ‘फेल होने’ की घबराहट में किया गया कदम भी माना जा रहा है।
जांच जारी—नेटवर्क कितना बड़ा था?
सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि इस मॉड्यूल का असली मास्टरमाइंड कौन था, विस्फोटक की सप्लाई कहां से हो रही थी, और आखिर इसका अंतिम लक्ष्य क्या था। NIA का मानना है कि सामने आया यह नेटवर्क सिर्फ 'टिप ऑफ द आइसबर्ग' है—और इसके पीछे एक देशव्यापी, हाई-टेक और व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल छिपा है। इस खुलासे ने सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया है और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले राज खुलने की संभावना है।