
उत्तर प्रदेश के किसानों तक विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक तकनीकें एवं उपयोगी जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय द्वारा कृषि विश्वविद्यालय किसानों के द्वार योजना के अंतर्गत विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। यह पहल किसानों के बीच वैज्ञानिक खेती, जैविक कृषि और आधुनिक तकनीकों के प्रसार की दिशा में विश्वविद्यालय का अभिनव प्रयास है। कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को कुलपति डॉ. के.के. सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन से हरी झंडी दिखाकर किया। उन्होंने विश्वविद्यालय बस को रवाना कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया।
तीन दलों में 21 वैज्ञानिक और 21 छात्र जुड़े
कार्यक्रम के प्रथम चरण में कुल 21 वैज्ञानिकों और 21 छात्रों ने सक्रिय सहभागिता की। तीन दलों का नेतृत्व डॉ. लालबहादुर सिंह, डॉ. रामचन्द्र एवं डॉ. शिशुपाल सिंह ने किया। इन दलों ने क्रमशः दौराला,अलीपुर व सुरानी ग्रामों में पहुंचकर किसानों, महिलाओं व स्कूली बच्चों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से अवगत कराया।
किसानों को मिली व्यवहारिक जानकारी
वैज्ञानिक दलों ने ग्रामीणों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, फसल विविधीकरण, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही कृषि योजनाएं, न्यूनतम समर्थन मूल्य, नवीन कृषि नीति, जीएसटी की नई दरें, महिला स्वास्थ्य, महिलाओं की कृषि में भूमिका तथा कृषि शिक्षा के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की।
महिला सशक्तिकरण और जनस्वास्थ्य पर भी विशेष फोकस
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और महिलाओं को कृषि उपयोगी जानकारियां, महिला सशक्तिकरण, जनस्वास्थ्य, तथा प्रदेश एवं केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के प्रति जागरूक करना है। वैज्ञानिकों ने ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और कृषि-आधारित लघु उद्योगों के बारे में भी जानकारी दी।
आगे छह गांवों में होंगे कार्यक्रम
कार्यक्रम के अगले चरण 13 व 17 अक्टूबर को मामेपुर, ललसाना, मीठेपुर, वलीदपुर, दशरथपुर और लोइया गांवों में आयोजित किए जाएंगे।
रबी और खरीफ सीजन में भी होगा आयोजन
कार्यक्रम की सफलता से उत्साहित होकर कुलपति डा. के. के. सिंह ने घोषणा की है कि अब यह कार्यक्रम रबी व खरीफ दोनों मौसमों में दो-दो बार आयोजित किया जाएगा, ताकि किसानों को फसल की शुरुआत और बीच की अवस्था में ही तकनीकी जानकारी उनके द्वार पर उपलब्ध कराई जा सके। कृषि विश्वविद्यालय का यह प्रयास किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।