भगोड़े हीरा कारोबारी Nirav Modi को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। विदेश में चल रही कानूनी लड़ाई के बीच उनकी प्रत्यर्पण रोकने की नई कोशिश भी नाकाम हो गई। कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए साफ संकेत दिया है कि पुराने आधारों पर बार-बार मामला उठाना स्वीकार्य नहीं है। इस फैसले से उनके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता और साफ होता नजर आ रहा है।
कोर्ट का सख्त रुख, दोहराए गए तर्क नहीं चले
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि पहले ही खारिज किए जा चुके मुद्दों को नए रूप में पेश कर दोबारा राहत नहीं मांगी जा सकती। जज ने टिप्पणी की कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट के इस रुख से साफ हो गया है कि अब नीरव मोदी के पास कानूनी विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया हुई तेज
इस फैसले के बाद भारत लाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत सरकार पहले से ही उनके खिलाफ कई मामलों में कार्रवाई कर रही है। अदालत के ताजा फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्यर्पण में अब कोई बड़ी बाधा नहीं बची है और आगे की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है।
बैंक घोटाले से जुड़ा है मामला
नीरव मोदी पर देश के बड़े बैंक घोटाले में शामिल होने के आरोप हैं। Punjab National Bank से जुड़े इस मामले में उन पर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन्होंने फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया था। यह मामला देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में गिना जाता है।
भारत में चल रही हैं कानूनी कार्रवाइयां
भारत में Central Bureau of Investigation और Enforcement Directorate जैसी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। उनके खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई भी की गई है। एजेंसियों का मानना है कि उनके प्रत्यर्पण के बाद मामले में तेजी आएगी।
बढ़ती मुश्किलें, घटते विकल्प
ताजा फैसले के बाद नीरव मोदी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कोर्ट के सख्त रुख ने यह साफ कर दिया है कि अब कानूनी दांव-पेंच ज्यादा काम नहीं आने वाले। ऐसे में उनके भारत लाए जाने की संभावना पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है, जिससे इस बहुचर्चित घोटाले में न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।