Nirjala Ekadashi 2025: वैसे तो हर माह एकादशी का व्रत आता है. लेकिन निर्जला एकादशी का व्रत साल में एक ही बार आता है. निर्जला का मतलब होता है इस व्रत में जल भी नहीं पीना होता. इसलिए ही इसका नाम निर्जला रखा गया है. ऐसे में आपका व्रत किसी कारणवश टूट जाता है तो घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है. भूल से की हुई गलती को भगवान भी माफ कर देते हैं. इसके लिए कुछ उपाय यहां बताए गएं हैं. यदि भक्त उन्हें पूरा कर लें तो ज्योतिष विद्या के अनुसार भगवान संबंधित व्यक्ति को क्षमा कर देते हैं.
व्रत टूटने पर करें ये उपाय
एकादशी व्रत टूट जाने पर सबसे पहले स्नान आदि कर साफ सुथरे कपड़े पहनें. इसके बाद दूध, दही, शहद, और चीनी के मिश्रण से पंचामृत बनाकर भगवान श्री विष्णु को अर्पित करें. साथ ही व्रत टूटने पर भगवान श्री हरि विष्णु की षोडशोपचार पूजा करना शुभ बताया गया है.. इसके साथ ही क्षमा मांगने के लिए निम्न मंत्रों का उच्चारण करें. मंत्र है-मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देवा परिपूर्ण तदस्तु मे॥ ॐ श्री विष्णुवे नमः क्षमा याचनं समर्पयामि॥
सबसे महत्वपूर्ण है निर्जला एकादशी का व्रत
सनातन धर्म में निर्जला एकादशी के व्रत को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. इस दिन व्रत रखने वाले लोगों से श्री विष्णु खुश होकर उनकी सभी मनोकामना पूरी करते हैं. निर्जला एकादशी में निर्जल यानी बिना पानी और अन्न के व्रत रखा जाता है. माना जाता है कि जो व्यक्ति साल की एक भी एकादशी व्रत न करें और निर्जला एकादशी का व्रत कर लें तो उसे सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है.
नोट: यह आर्टिकल मान्यताओं व परम्पराओं पर आधारित है, लोकसत्य मीडिया संस्थान इसकी पुष्टि नहीं करता है..