
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में सीट शेयरिंग का मामला सुलझने के बजाय और उलझता जा रहा है। बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास), एचएएम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के बीच सीटों का फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने दम पर उम्मीदवारों के नाम घोषित करना शुरू कर दिया है।
परंपरागत सीटों पर कब्जा बरकरार रखेगी JDU
शनिवार को बक्सर जिले के राजपुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने पूर्व मंत्री संतोष निराला को जेडीयू प्रत्याशी घोषित कर दिया। खास बात यह रही कि इस मौके पर बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद थे। इससे साफ संकेत मिला कि जेडीयू सीट बंटवारे का इंतज़ार किए बिना अपनी परंपरागत सीटों पर कब्जा बरकरार रखेगी।
दलित चेहरे को दोबारा मौका
राजपुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। यहां से संतोष निराला पहले भी दो बार मंत्री रह चुके हैं और उन्हें जेडीयू का दलित चेहरा माना जाता है। 2020 के चुनाव में वे कांग्रेस उम्मीदवार विश्वनाथ राम से हार गए थे। इसके बावजूद नीतीश ने उन्हें फिर से मौका देकर अपने दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।
जेडीयू की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू ने अपनी सीटों को दो श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में वे सीटें हैं जहां प्रत्याशी भी तय हो चुका है। दूसरी श्रेणी में वे सीटें हैं जहां नाम को लेकर अभी चर्चा जारी है। राजपुर सीट पहली श्रेणी में आती है और इसी कारण यहां संतोष निराला को टिकट देने का ऐलान कर दिया गया। जेडीयू ने ऐसे दर्जनभर से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों की सूची लगभग फाइनल कर ली है।
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एनडीए में सीटों की खींचतान
2020 में जेडीयू ने 115 और बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन इस बार घटक दलों की संख्या अधिक है, लिहाजा बीजेपी और जेडीयू दोनों को कुछ सीटें छोड़नी पड़ेंगी। जेडीयू साफ कह चुकी है कि वह बीजेपी से कम से कम एक सीट ज्यादा पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, चिराग पासवान और जीतनराम मांझी भी अपनी-अपनी सीटों की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में एनडीए के भीतर टकराव बढ़ गया है।
नेताओं की अलग-अलग राय
एचएएम के अध्यक्ष जीतनराम मांझी का कहना है कि बिहार और भारत को एनडीए की ज़रूरत है, इसलिए सभी दलों को मिलकर गठबंधन को मज़बूत करना चाहिए। दूसरी ओर एलजेपी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की ताकत रखती है और 2020 में इसका सबूत भी दे चुकी है।
एनडीए और बीजेपी को नीतीश का संदेश
नीतीश कुमार का संतोष निराला का नाम घोषित करना सिर्फ एक उम्मीदवार की घोषणा नहीं, बल्कि एनडीए और खासकर बीजेपी को संदेश है कि जेडीयू अपनी परंपरागत सीटों पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगी। अब देखना होगा कि सीट शेयरिंग के इस पेचीदा समीकरण का हल कैसे निकलता है।