
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे का समझौता तो हो गया, लेकिन अब उम्मीदवारों के ऐलान के बाद भीतरघात की तस्वीरें साफ दिखने लगी हैं. बीजेपी और जेडीयू ने बराबर यानी 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जबकि बाकी 41 सीटें सहयोगी दलों एलजेपी (राम विलास), आरएलएम और हम (हिंदुस्तान आवाम मोर्चा) में बांटी गई थीं. मगर नीतीश कुमार ने अपने कदम से इस फार्मूले को हिला दिया है.
चिराग के कोटे की सीटों पर जेडीयू के प्रत्याशी
जेडीयू ने अपनी पहली 57 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. इसमें पांच सीटें मोरवा, गायघाट, राजगीर, सोनबरसा और एकमा ऐसी हैं जो चिराग पासवान के कोटे में मानी जा रही थीं लेकिन जेडीयू ने इन पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. इससे यह साफ हो गया है कि नीतीश कुमार अपनी मजबूत सीटें किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं हैं. जहां राजगीर से कौशल किशोर, सोनबरसा से रत्नेश सदा, एकमा से धूमल सिंह, मोरवा से विद्यासागर निषाद और गायघाट से कोमल सिंह को जेडीयू ने टिकट दिया है. इन सीटों पर एलजेपी को अधिकार मिलने की चर्चा थी, लेकिन अब जेडीयू ने साफ कर दिया है कि वह अपनी जीती हुई सीटें किसी सहयोगी दल को नहीं देगी.
जेडीयू ही नहीं, मांझी और कुशवाहा भी नाराज़
वहीं इस सीट बंटवारे के बाद सिर्फ जेडीयू ही नहीं, उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी भी नाराज़ हैं. मांझी ने तो यहां तक कह दिया कि वे चिराग पासवान को दी गई मखदुमपुर सीट पर अपना प्रत्याशी उतारेंगे. इससे एनडीए के अंदर खुली लड़ाई की स्थिति बन गई है. वहीं जेडीयू का कहना है कि जब शुरुआती बातचीत पटना में हुई थी. उस समय चिराग पासवान को 22 सीटें देने की बात तय हुई थी, लेकिन दिल्ली में हुई बैठक के बाद अचानक एलजेपी को 29 सीटें दे दी गईं. यही वजह है कि नीतीश कुमार अब इस समझौते से खुश नहीं हैं.
एनडीए में बढ़ती तकरार से बीजेपी परेशान
एनडीए में बढ़ती इस तकरार से बीजेपी की परेशानी बढ़ गई है. पार्टी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े बीते एक साल से एनडीए में तालमेल और चुनावी माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन नीतीश, मांझी और कुशवाहा की नाराज़गी ने सारा समीकरण बिगाड़ दिया है. बीजेपी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सियासी संतुलन बनाए रखना है. जेडीयू का कहना है कि उसका गठबंधन सीधे बीजेपी से है, जबकि चिराग पासवान, मांझी और कुशवाहा का गठबंधन बीजेपी के जरिए है, इसलिए वह इन छोटे दलों के लिए अपनी सीटें नहीं छोड़ेगी.
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एनडीए में मची अंदरूनी खींचतान
नीतीश कुमार के इस कदम के बाद एनडीए में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है. जहां बीजेपी चिराग पासवान को साथ रखकर युवा वोटरों को साधना चाहती है, वहीं जेडीयू अपने पुराने गढ़ पर पकड़ बनाए रखना चाहती है. ऐसे में बिहार में एनडीए की एकता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.