
भारतीय रिजर्व बैंक ने अगस्त महीने की मौद्रिक नीति समिति बैठक के बाद आज देश की मौद्रिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण एलान किए. आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि रेपो रेट यानी मुख्य ब्याज दर को 6.5% पर बरकरार रखा गया है यानी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. आरबीआई का यह फैसला बताता है कि वह देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के साथ-साथ आम लोगों को धीरे-धीरे राहत देने की नीति पर काम कर रहा है. आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक विकास के आंकड़ों के आधार पर अगली मौद्रिक नीति में बदलाव संभव हो सकता है.
क्या है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है. इस दर में बदलाव होने से आपकी लोन की EMI (ईएमआई) पर भी असर पड़ता है. लेकिन चूंकि इस बार कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI में भी अभी कोई बदलाव नहीं होगा.
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पहले क्या हुआ था?
इससे पहले जून 2025 की मौद्रिक नीति में आरबीआई ने रेपो रेट में 0.50% (50 बेसिस प्वाइंट्स) की कटौती की थी. अप्रैल में भी 0.25% की कटौती की गई थी. लेकिन इस बार समिति ने फैसला किया कि फिलहाल देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ब्याज दर में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा.
विकास दर का अनुमान भी जस का तस
आरबीआई गवर्नर ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास दर (GDP ग्रोथ रेट) का अनुमान 6.5% पर ही बरकरार रखा गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए सतर्कता जरूरी है.
क्यों नहीं बदली ब्याज दर?
संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह फैसला देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, महंगाई दर और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है कि फिलहाल नीतिगत रुख तटस्थ ही रहेगा.
आम जनता के लिए क्या मतलब?
इस फैसले का सीधा असर यह है कि फिलहाल आपकी लोन की किस्तों में कोई राहत नहीं मिलेगी लेकिन यह भी अच्छी बात है कि महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.