No UPI Day MDR Fee : देशभर के कई व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि इस दिन कई दुकानदार और कारोबारी यूपीआई के जरिए भुगतान लेने से इनकार कर सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों को नकद या कार्ड के जरिए भुगतान करना पड़ सकता है। इस फैसले के बाद डिजिटल भुगतान को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
व्यापारी आखिर नाराज क्यों हैं?
व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत एमडीआर शुल्क उनके लिए अतिरिक्त बोझ बनेगा। किराना, पेट्रोल-डीजल, अनाज और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबार में पहले से ही मुनाफा कम होता है। ऐसे में हर लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से व्यापारियों की लागत बढ़ जाएगी। इसी वजह से कई संगठन सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
Mumbai, Maharashtra: President, MACCIA, Ravindra Mangave says, "The MDR charge imposed on UPI is an issue of concern. Because of UPI, the country has adopted a digital payment system, and UPI is our country’s digital pride. However, in protest against the MDR being imposed on… pic.twitter.com/XygLqEAKYI
— IANS (@ians_india) September 23, 2026
कौन-कौन से संगठन आंदोलन में शामिल?
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM), कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स समेत कई बड़े व्यापारी संगठन इस अभियान का समर्थन कर रहे हैं। व्यापारियों का दावा है कि देश के अलग-अलग राज्यों के सैकड़ों संगठन इस विरोध में शामिल होंगे। कुछ संगठनों ने सरकार को चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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MDR क्या होता है, आसान भाषा में समझिए
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक तरह का सेवा शुल्क है। जब कोई ग्राहक यूपीआई या कार्ड से भुगतान करता है, तो उस भुगतान को ग्राहक के खाते से दुकानदार के खाते तक पहुंचाने के लिए बैंक और भुगतान प्रणाली काम करती है। इस पूरी प्रक्रिया की लागत के लिए जो शुल्क लिया जाता है, उसे एमडीआर कहा जाता है। फिलहाल इसी शुल्क को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
15 अक्टूबर से क्या बदल सकता है?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लग सकता है। हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। यानी लेनदेन कितना भी बड़ा हो, व्यापारी से 300 रुपये से ज्यादा शुल्क नहीं लिया जाएगा। फिर भी व्यापारी संगठन इसे स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर 2 अक्टूबर को बड़ी संख्या में व्यापारी यूपीआई भुगतान लेना बंद करते हैं तो ग्राहकों को परेशानी हो सकती है। लोगों को खरीदारी के लिए नकद पैसे या कार्ड साथ रखना पड़ सकता है। हालांकि यह एक दिन का प्रतीकात्मक विरोध है, लेकिन इससे यह साफ हो गया है कि डिजिटल भुगतान पर शुल्क का मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। अब सबकी नजर सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर टिकी है।