
Nobel Peace Prize 2025: नोबेल शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा होते ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदें धराशायी हो गईं। इस बार का प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया है। हर साल नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी यह सम्मान उन व्यक्तियों या संगठनों को देती है जो विश्व शांति, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उल्लेखनीय कार्य कर चुके हों। इस बार का फैसला वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र और महिला नेतृत्व के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप के अरमान अधूरे रह गए
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के वर्षों में अपनी विदेश नीति, विशेषकर मध्य पूर्व के शांति समझौतों को लेकर कई बार खुद को नोबेल के योग्य बताया था। लेकिन विशेषज्ञों का मानना था कि उनके चयन की संभावना बेहद कम है, क्योंकि यह पुरस्कार आमतौर पर उन लोगों को मिलता है जिन्होंने लंबे समय तक वैश्विक शांति के लिए सतत योगदान दिया हो। नॉर्वे में घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया पर ट्रंप समर्थक निराशा जताते दिखे, जबकि मचाडो के समर्थकों ने इस निर्णय को “तानाशाही के खिलाफ साहस की जीत” कहा।
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कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो
मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी चेहरा हैं, जिन्होंने लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए वर्षों से संघर्ष किया है। औद्योगिक इंजीनियर रहीं मचाडो ने 2002 में चुनाव निगरानी समूह “सूमाते” की स्थापना की थी और बाद में वेंटे वेनेजुएला पार्टी की राष्ट्रीय समन्वयक बनीं। उन्होंने 2023 में सरकार द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बावजूद विपक्षी प्राथमिक चुनाव जीता और लोकतांत्रिक आंदोलन की प्रतीक बन गईं। मचाडो पहले भी बीबीसी और टाइम पत्रिका की प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल रह चुकी हैं।
पिछले साल 2024 का नोबेल शांति पुरस्कार जापान की संस्था निहोन हिदानक्यो को मिला था, जो दशकों से परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम कर रही है। इस बार के चयन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि नोबेल कमेटी विश्वभर में साहसिक नेतृत्व और शांति की आवाज़ उठाने वालों को प्राथमिकता देती है।