
हर साल दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार उन लोगों को सम्मानित किया जाता हैं जिन्होंने मानवता, ज्ञान और समाज की भलाई में असाधारण योगदान दिया हो. साल 2025 में भी विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में दस प्रतिभाशाली व्यक्तियों को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है. वहीं इस साल नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो को प्रदान किया गया है।
मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार
वेनेजुएला की प्रमुख राजनेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है. उन्होंने सालों से अपने देश में लोकतंत्र, पारदर्शी चुनाव और नागरिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया है. मारिया का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को कराकस, वेनेजुएला में हुआ था. उन्होंने एन्ड्रेस बेल्लो कैथोलिक यूनिवर्सिटी से औद्योगिक इंजीनियरिंग और IESA से वित्त में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की. उन्होंने 2002 में सुमाते नामक चुनाव निगरानी समूह की सह-संस्थापक के रूप में राजनीति में कदम रखा और 2010 से 2015 तक संसद सदस्य रहीं. वेनेजुएला में लोकतंत्र को मजबूत करने के उनके प्रयासों को ही इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
मेडिसिन में क्रांतिकारी खोज को नोबेल
फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार इस बार मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड राम्सडेल और शिमोन साकागुची को मिला है. इन वैज्ञानिकों ने शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और टी-सेल्स के नियंत्रण पर अद्वितीय शोध किया. इनके काम ने ऑटोइम्यून रोगों और कैंसर उपचार के क्षेत्र में नई दिशा दी है.
भौतिकी में क्वांटम सर्किट की क्रांति
भौतिकी का नोबेल पुरस्कार 2025 जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को दिया गया है. इन वैज्ञानिकों ने क्वांटम सर्किट्स के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया, जिससे आधुनिक क्वांटम कंप्यूटर की नींव रखी गई.
जॉन क्लार्क (कैम्ब्रिज, 1942) ने सुपरकंडक्टिंग सर्किट और SQUID जैसे उपकरणों पर शोध किया, जिन्होंने यह साबित किया कि बड़े इलेक्ट्रिक सर्किट में भी क्वांटम प्रभाव संभव हैं.
मिशेल एच. डेवोरेट, फ्रांस में जन्मे वैज्ञानिक, ने ट्रांसमॉन और फ्लक्सोनियम क्यूबिट्स के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने दिखाया कि इलेक्ट्रिक सर्किट्स में “कृत्रिम परमाणु” बनाना संभव है.
जॉन एम. मार्टिनिस, अमेरिका के भौतिक विज्ञानी, ने गूगल और अन्य प्रयोगशालाओं में क्वांटम चिप्स पर काम किया. उनके प्रयोगों ने यह दिखाया कि किस तरह सर्किट्स में क्वांटम व्यवहार को व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सकता है.
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रसायन विज्ञान में नई सोच को नोबेल
रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉबसन और उमर एम. याघी को दिया गया है. इन वैज्ञानिकों ने रेटिकुलर और फ्रेमवर्क केमिस्ट्री को आगे बढ़ाया, जिससे ऊर्जा भंडारण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलीं.
लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को साहित्य में नोबेल
साहित्य का नोबेल पुरस्कार 2025 हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को मिला है. उनकी रचनाएं मानव जीवन के गहरे भावनात्मक और दार्शनिक पहलुओं को उजागर करती हैं. उनकी लेखन शैली पाठकों को आत्म-चिंतन और समाज की जटिलताओं पर सोचने को प्रेरित करती है.