वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार सौंपने के बाद से एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। मचाडो ने समुद्र के रास्ते अपने देश से भागने के दर्दनाक अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि मादुरो सरकार के बढ़ते दबाव के बीच इस खतरनाक यात्रा के दौरान उन्हें अपनी जान का डर था, इसके बाद वह अमेरिका पहुंचीं।
तेज हवाओं ने जहाज को हिला दिया
मचाडो ने हेरिटेज फाउंडेशन थिंक-टैंक में हुई वॉशिंगटन न्यूज कॉन्फ्रेंस में रिपोर्टरों को बताया, “यात्रा के दौरान नाव में एक पल ऐसा आया, जब मुझे चोट लगी क्योंकि लहरें छह फीट से भी ज्यादा ऊंची थीं। तेज हवाओं ने जहाज को हिला दिया और जरूरी नेविगेशन सिस्टम एक साथ फेल हो गए। हम समुद्र में खो गए। हमने जीपीएस का सिग्नल खो दिया। सैटेलाइट फोन ने काम करना बंद कर दिया और स्टारलिंक एंटीना भी ठीक से काम नहीं कर रहा था, सब एक ही समय में हुआ।”
नुकसान पहुंचाने की क्षमता कम नहीं
मचाडो ने कहा कि स्थिति बहुत खतरनाक और डरावनी थी और यह कई घंटों तक चली। लेकिन आखिर में, जैसा कि मैं कहती हूं, हम आगे बढ़ गए। इसमें शामिल लोगों की सुरक्षा के लिए मैं तब तक इंतजार करूंगी जब तक सरकार की उन्हें नुकसान पहुंचाने की क्षमता कम नहीं हो जाती।
उनका बचना कोई इत्तेफाक नहीं
मचाडो ने कहा कि उन्हें लगता है कि उनका बचना कोई इत्तेफाक नहीं था। इसलिए मुझे लगता है कि यह एक चमत्कार है। मैं यहां हूं और मुझे पता है कि किसी दिन मैं आपको सारी जानकारी विस्तार से दे पाऊंगी। वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को मचाडो ने व्यक्तिगत दुश्मनी के बजाय आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा, यह ड्रग कार्टेल और न्याय के बारे में है। यह एक क्रिमिनल स्ट्रक्चर के बारे में है।