
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन की तारीख नजदीक आते ही, आसपास के क्षेत्रों को एक्सप्रेस-वे के माध्यम से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अब यमुना एक्सप्रेस-वे (Yamuna Expressway) को ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे (Eastern Peripheral Expressway - EPE) से सीधे इंटरचेंज के माध्यम से जोड़ा जा रहा है।
अक्टूबर माह से निर्माण कार्य शुरू
यह बहुप्रतीक्षित इंटरचेंज गौतम बुद्ध नगर के जगनपुर अफजलपुर गांव के नजदीक, यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो पॉइंट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इसकी जिम्मेदारी संभाली गई है और अक्टूबर माह से ही इस महत्वपूर्ण इंटरचेंज का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह प्रोजेक्ट लगभग एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग ₹222 करोड़ से लेकर ₹270 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस इंटरचेंज में आठ लूप (Four loops and four ramps) बनाए जाएंगे, जिनकी कुल लंबाई लगभग 11 किलोमीटर होगी। यह क्लोवर लीफ इंटरचेंज (Clover Leaf Interchange) के डिजाइन पर आधारित होगा।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव
इस इंटरचेंज के पूरा होने के बाद, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई जिलों के लोगों को नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुँचने में अभूतपूर्व सुविधा मिलेगी। यह नया मार्ग पलवल, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बागपत, गाजियाबाद के साथ-साथ मथुरा, अलीगढ़ और आगरा जैसे शहरों को एक-दूसरे से सीधे जोड़ देगा। वर्तमान में, यमुना एक्सप्रेस-वे से ईपीई पर जाने के लिए या इसके विपरीत, वाहन चालकों को परी चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों से होकर 15 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इस इंटरचेंज के बनने से यह अनावश्यक यात्रा समाप्त हो जाएगी और इन शहरों के बीच आवागमन तेज, आसान और सुगम हो जाएगा। यह कनेक्टिविटी न केवल यात्रियों के लिए बल्कि औद्योगिक और मालवाहक वाहनों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, जो नोएडा एयरपोर्ट को उत्तरी भारत का एक प्रमुख मल्टी-मॉडल हब बनाने में सहायक होगी।