नोएडा के सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में फंसे सैकड़ों फ्लैट खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अदालत ने नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह गोदरेज बिल्डर की ‘नेस्ट’ परियोजना के छह आवासीय टावरों के लिए कंडीशनल अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate - OC) जारी करे। यह निर्णय उन 450 फ्लैटों से जुड़ा है जिनकी रजिस्ट्री लंबे समय से रुकी हुई थी और जिनमें कई परिवार वर्षों से कब्जे का इंतजार कर रहे थे।
स्पोर्ट्स एक्टिविटी विकसित की गई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डर से यह जानकारी मांगी है कि परियोजना में कितनी स्पोर्ट्स एक्टिविटी विकसित की गई है। चूंकि यह क्षेत्र स्पोर्ट्स सिटी के रूप में विकसित किया जाना था, इसलिए खेल सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर प्राधिकरण ने स्पष्ट रिपोर्ट तलब की है। बिल्डर को निर्देश दिया गया है कि वह यह बताए कि कितनी सुविधाएं जमीन पर विकसित की गई हैं और कितनी अभी प्रस्तावित हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद ही कंडीशनल ओसी जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी
यह मामला गोदरेज बिल्डर की ब्रिक राइज परियोजना से जुड़ा है, जो सेक्टर-150 के एससी-2 भूखंड पर स्थित है। नोएडा प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा। यदि कंडीशनल ओसी जारी हो जाती है, तो इन फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो जाएगा और खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि यह राहत फिलहाल केवल छह टावरों तक सीमित है, लेकिन यह स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में फंसे अन्य प्रोजेक्टों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
समय-समय पर रिपोर्ट भी ली जाएगी
इस फैसले से उन परिवारों को उम्मीद की किरण मिली है जो चार वर्षों से अपने फ्लैट की रजिस्ट्री और कब्जे का इंतजार कर रहे थे। नोएडा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि कंडीशनल ओसी केवल उन्हीं टावरों को दी जाएगी जिनमें निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और जिनमें निवास की स्थिति सुरक्षित है। साथ ही, बिल्डर को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्पोर्ट्स सिटी की मूल अवधारणा के अनुरूप खेल सुविधाएं विकसित की जाएं। प्राधिकरण की निगरानी में यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और समय-समय पर रिपोर्ट भी ली जाएगी।
यह घटनाक्रम नोएडा के रियल एस्टेट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहां वर्षों से अटके प्रोजेक्टों को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से गति मिल रही है। खरीदारों को अब उम्मीद है कि अन्य लंबित प्रोजेक्टों में भी इसी तरह की पहल होगी और उन्हें उनका हक जल्द मिलेगा।